Friday, August 29, 2025

वीरांगना की स्मृति में जला अखंड दीप

वीरांगना की स्मृति में जला अखंड दीप। ▪समाजसेवी स्वर्गीय त्रिभुवन नाथ मिश्र की प्रेरणा से पुन: अखंड दीप जलना हुआ शुरू वाराणसी 14 जुलाई। भदैनी स्थित वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली पर विगत 1 साल से जल रहा अखंड दीप समाजसेवी एवं जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र के पिता त्रिभुवन नाथ मिश्रा के 21 जून को असामयिक निधन के कारण कुछ दिनों के लिए बंद हो गया था जिसे आज पुन: शुरू किया गया। रविवार को महारानी की स्मृति मे अखंड दीप जलाया गया। अखंड दीप का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाज सेविका श्रीमती महालक्ष्मी शुक्ला, समारोह के अध्यक्ष लोक भूषण सम्मान से सम्मानित साहित्यकार डॉ जयप्रकाश मिश्रा, विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी के सेमी असिस्टेंट को प्रोफेशनल रामा पांडे एवं जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इस अवसर पर श्रीमती महालक्ष्मी शुक्ला ने कहा की महारानी लक्ष्मीबाई ने अपने साहस और पराक्रम से अंग्रेजों को भागने पर मजबूर कर दिया ऐसी वीरांगना की जन्मस्थली पर आकर गर्व की अनुभूति हो रही है ऐसी देवी को शत-शत नमन। साहित्यकार डॉक्टर जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि मुह बोलो हर बोलो से हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी। थी, साथ ही वह काशी की बेटी थी ।आज उनके स्मृति में अखंड दीप जलाने का जो पुनीत कार्य किया गया है वह बहुत ही सराहनीय है और देश के शहीदों के नाम पर इस तरह के आयोजन होने चाहिए ।वहीं विशिष्ट अतिथि रामा पांडे ने कहा कि आज बिरंगाना की जन्मस्थली पर आकर बहुत ही गर्व की अनुभूति हो रही है। अखंड दीप जलाने में हमसे जो सहयोग होगा हम करेंगे वहीं कार्यक्रम के संयोजक जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा की महारानी की स्मृति में उनकी जन्मस्थली पर अखंड दीप पिछले एक साल से अनवरत जल रहा था लेकिन 21 जून को उनके मेरे पिताजी त्रिभुवन नाथ मिश्र के असामयिक निधन होने से अखंड दीप जालना बंद हो गया था आज पिताजी की प्रेरणा से पुन: अखंड दीप जलाने का कार्य शुरू किया गया है और यह अखंड दीप स्वर्गीय त्रिभुवन नाथ मिश्रा जी के प्रेरणा से अब अनुराधा जलता रहेगा ।कार्यक्रम का संचालन रामयश मिश्र ने किया तथा धन्यवाद नवीन सेवा समिति के अध्यक्ष नवीन वाजपेई ने किया इस अवसर पर विनय मिश्रा, प्रियंका,सोनल,राम भरत, इन्द्रबहदर, आनन्द जी,प्रियंवादा तिवारी, गणेश शंकर शुक्ला सहित काशी के वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे। भवदीय

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