करमा ब्लॉक में शौचालय, बाथरूम व किचन युक्त एक ही कमरे में चल रहा है प्राइमरी पाठशाला
असना प्राथमिक विद्यालय में दर्जनों छात्र/छात्राएं नाक बंद कर करते हैं अध्ययन
इस विद्यालय में पेय जल हेतु लगाया गया हैंड पाइप ग्राम प्रधान की उदासीनता के कारण बरसों से पड़ा है खराब
ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय अधिकारियों से प्रधानाचार्य द्वारा अनेंकों बार शिकायत के बाद भी अब तक नहीं निकला गया कोई समाधान
सोनभद्र
शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, परंतु जिले में एक ऐसा भी प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहा है जहां एक ही कमरे में शौचालय, बाथरूम व किचन भी स्थित है। एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक का क्लास संचालित है। विषय गौरतलब है कि एक ही कमरे में प्रधानाचार्य सहित अन्य तीन अध्यापक भी रहते हैं। यह विद्यालय विगत पांच वर्षों से संचालित है। आश्चर्य है कि शिक्षा विभाग की आलाधिकारियों द्वारा भी आज तक इस विद्यालय का न निरीक्षण किया गया, नहीं इस उदासीनता के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई। बदबू युक्त कमरे में बच्चों को भोजन कराना, अध्ययन कराना कितना संभव है। इस दुर्व्यवस्था से स्पष्ट है कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य निश्चित रूप से अंधकार मय है। इस विद्यालय की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैलते ही क्षेत्रिय संवाददाताओं में विद्यालय का दौरा किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य कुछ बताना नहीं चाह रहे थे लेकिन पत्रकारों द्वारा बार-बार कुरेदने पर प्रधानाचार्य संदीप कुमार तिवारी ने जो बताया उससे साफ हो गया कि विद्यालय के विकास के प्रति न ग्राम प्रधान उत्सुक है और नहीं क्षेत्रीय अधिकारी ही अपने जिम्मेदारी का निर्वहन कर पा रहे हैं। इस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य पूर्ण रूप से अंधकार मय है। तथा अध्यापक भी किसी प्रकार समय गुजारकर वेतन भोगी बने हुए हैं। ग्राम प्रधान व अधिकारियों के उदासीनता के कारण सरकार द्वारा बनाया गया बच्चों के शैक्षणिक विकास हेतु ”शिक्षा का अधिकार” कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि बच्चों को पेयजल हेतु एक हैंड पाइप लगाया गया है। इसी बोरिंग में समरसेबल भी लगाया गया है।न हैंड पाइप काम करता है नहीं समरसेबल ही काम करता है।जिससे विद्यालय मे बच्चों का पेयजल पूरी तरह से प्रभावित है।इसको ठीक कराने हेतु ग्राम प्रधान से कई बार निवेदन किया गया।
परंतु ग्राम प्रधान की निष्क्रियता हैंड पाइप शोपीस बना हुआ है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे या पढ़ाने वाले अध्यापकों को पेय जल हेतु इधर-उधर भटकना पड़ता है।विद्यालय भ्रमण के दौरान पत्र प्रतिनिधियों ने पाया कि विद्यालय जाने हेतु ग्रामीणों व बच्चों को विद्यालय जाने हेतु रास्ते का अभाव है। विद्यालय जाने हेतु कीचड़ युक्त कच्चा मार्ग है। जहां बरसात के दिनों में विद्यालय जाना संभव नहीं हो पाता है। सरकार का आदेश है हर गांव व विद्यालय जाने वाले मार्गो को पक्का बनाकर या खड़ंजा लगाकर मुख्य मार्गो से जोड़ा जाए। इस पर भी यदि नजर डाला जाए तो यहां भी सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी से ग्रामीणों ने मांग किया है कि कीचड़ युक्त मार्ग व शौचालय, बाथरूम व किचन युक्त एक ही कमरे में विद्यालय कैसे चल रहा है ? जांच कर करा कर अभिलंब दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कराते
हुए क्षेत्र के समस्याओं का समाधान कराया जाए।
Up18news report by Siraj Ahmed