वाराणसी : हाई स्पीड (बुलेट ट्रेन) रेल मार्ग परियोजना का पहला फेज वाराणसी से हावड़ा (वाया पटना) तक 753 किलोमीटर तक प्रस्तावित है। इसके लिए किसानों और नागरिकों के साथ विचार विमर्श के लिए 20 सितंबर को बैठक होगी। कमिश्नरी सभागार में यह बैठक दोपहर 12 बजे से प्रस्तावित है। इस प्रकार बुलेट ट्रेन पटरी पर आने लगी है।
भारत सरकार व राज्य सरकारों के संयुक्त उद्यम नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की ओर से आयोजित बैठक में योजना के सामाजिक व पर्यावरणीय विषयों पर जनता से परामर्श किया जाएगा। मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन 2026 तक दौड़ने लगेगी। इधर वाराणसी हावड़ा वाया पटना बुलेट ट्रेन रेल कारिडोर परियोजना भी पटरी पर आती दिखने लगी है। जिले में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। यह पूरी योजना दिल्ली-हावड़ा तक है। प्रथम फेज में वाराणसी से हावड़ा कारिडोर बनाया जाएगा। दूसरे फेज में दिल्ली से वाराणसी वाया लखनऊ का निर्माण किया जाएगा। बुलेट ट्रेन वाराणसी में चिरईगांव विकास खंड के नरायनपुर, उक्थी, सिरिस्ती, अमौली, रैमला, छितौनी, बकैनी, देवरिया, धराधर आदि गांवों से होकर गुजरेगी। भूमि चिह्नित कर ली गई है। परियोजना में जितने किसानों की जमीन चिह्नित की गई है, उनकी सूची भी जारी कर दी गई है। कई स्थानों पर पत्थर भी गाड़
चिरईगांव के भगतुआ-छितौनी गांव को जाने वाली सड़क के किनारे हाई स्पीड रेल कारिडोर के लिए की गई मार्किंग जागरण योजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर जनता संग परामर्श के लिए 20 को बैठक, पहला फेज शुरू हो रहा वाराणसी से वाया पटना हावड़ा तक बीच में आठ स्टेशन पर ठहराव
वाराणसी, बक्सर, आरा, पटना व नवादा, धनबाद, आसनसोल, दुर्गापुर, वर्धमान और हावड़ा है। हाई स्पीड रेल से अधिकतम तीन घंटे में वाराणसी से कोलकाता पहुंचना संभव होगा। प्रस्तावित हाई स्पीड रूट पर अधिकतम गति 350 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है।
दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर गांवों को जोड़ने वाली सड़कों पर अंडरपास बनाने के लिए पिलर का स्थान भी तय कर लिया गया है।
कारिडोर में एलिवेटेड, भूमिगत होने के साथ ग्रेड (समतल भूमि) पर बिछाई जाएगी। एलिवेटेड हिस्से की उंचाई 20 फीट होगी।