🙏चिरईगांव/वाराणसी। ग्राम पंचायतों में हो रहे विकास कार्यों के सम्बंध में प्रायः ग्रामीणों की ओर से ही ग्राम प्रधान अथवा पंचायत सचिव पर गबन का आरोप लगाये जाते रहे हैं, लेकिन जब ग्राम प्रधान के द्वारा अपने ही पंचायत सचिव पर धन हड़पने का आरोप लगने लगे तो मामले की गम्भीरता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।
जिलाधिकारी को पत्र लिखकर लगायी न्याय की गुहार प्रकरण चिरईगांव विकास खण्ड के अइली ग्राम पंचायत का है जहां के ग्राम प्रधान रामफेर ने विकास कार्यों में प्रस्तावित जांच को रफा-दफा करने के नाम पर ग्राम पंचायत सचिव पर 75 हजार रुपए लेने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की है। ग्राम प्रधान ने बताया कि वे दलित परिवार से हैं, उनके गांव के पंचायत सचिव ने उसके विरुद्ध अइली गांव के निवासी अपने एक रिश्तेदार से विकास कार्यों में अनियमितता के बाबत जिलाधिकारी के यहां मेरे खिलाफ शिकायत करवायी।
चिरईगांव ब्लॉक के अइली ग्राम पंचायत का मामला फाइनल रिपोर्ट लगवाने के नाम पर एक लाख की मांग : ग्राम प्रधान ने बताया कि शिकायत के पश्चात विकास कार्यों की जांच जनपद के डीपीआरओ को करनी थी। पंचायत सचिव ने विकास कार्यों की जांच में फाइनल रिपोर्ट लगवाने के नाम पर उससे एक लाख रुपए की मांग की। ग्राम प्रधान की मानें तो उन्होंने ऊंची ब्याज दर पर पैसा उधार लेकर दो बार में 75 हजार रुपए पंचायत सचिव को दे दिये। पंचायत सचिव को धनराशि उपलब्ध कराने का पूरा साक्ष्य होने का दावा करते हुए ग्राम प्रधान ने बताया कि उसके बाद भी जांच रिपोर्ट उसके विरुद्ध प्रस्तुत कर कार्रवाई की गयी। हालांकि उक्त प्रकरण में जब पंचायत सचिव से बात की गयी तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मुझे बदनाम करने की साजिश है। ग्राम प्रधान के पास मेरे खिलाफ कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है। हालांकि ग्राम प्रधान को हाईकोर्ट से मोहलत मिल गई है, लेकिन अब ग्राम प्रधान ने अपना पैसा वापस दिलाये जाने के साथ ही सचिव पर कार्रवाई की मांग करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगायी है।