Saturday, August 30, 2025

चंद्रा साहित्य परिषद के काव्यपाठ आयोजन में कवियों ने कविता के माध्यम से हिंदी को अधिक गति देने का किया आह्वान

 

 

चंद्रा साहित्य परिषद के काव्यपाठ आयोजन में कवियों ने कविता के माध्यम से हिंदी को अधिक गति देने का किया आह्वान

 

चंद्रा हिंदी श्री सम्मानित हुए वरिष्ठ जन

 

 

 

वाराणसी। हिंदी दिवस की अवसर पर चंद्रा साहित्य परिषद कार्यालय, प्रभात नगर, इंदिरा नगर समीप चितईपुर में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया I

समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों को अंग वस्त्रम् और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया I

मुख्य अतिथि जाने माने गीतकार परम हंस तिवारी परम, विशिष्ट अतिथि गिरीश पांडे बनारसी, नाथ सोनांचली और संतोष कुमार प्रीत रहे I

अध्यक्ष काशिका के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार दीपक दबंग तथा संचालन सिद्ध नाथ शर्मा सिद्ध ने किया I

दिनेश चंद्र ने ने कहा हम सब का सम्मान है हिंदी, हम सब का अभिमान है हिन्दीIदेश मे सबको जोड़े है जो भाषा,अखंड भारत की शान है हिंदीII सुनाकर हिंदी दिवस को सार्थक बनाया I

आई ए जे के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कैलाश सिंह विकास, वरिष्ठ पत्रकार और डॉ. सुभाष चंद्रा के गरिमामयी उपस्थिति में सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।जहाँ डॉ. छोटे लाल मनमीत की सुरीली रचना -जुर्म का हाथ लम्बा हुआ है ,तब कहीं जाके दंगा हुआ है IIतालियां बजाने को मजबूर कर दीं वहीं माधुरी मिश्रा -याद उसको मैं आना नही चाहती।फिर भी उसको भुलाना नही चाहती।। श्रोताओं ने खूब सराही इसके बाद डॉ. सुभाष चंद्रा की कविता-गिरीपति मेरा मन निश्चल,गिरिराज सहारा क्या होगा । परम हंस तिवारी परम की रचना विषय परिवर्तन करते हुए कहा कि -रोज मनेगा हिन्दी उत्सव नहीं मनाएंगे पखवाड़ा ने सुनाया Iसिद्ध नाथ शर्मा सिद्ध “बात समझ ना पाया कैसे राम लिखा पत्थर उतराये ‌पानी में” और नाथ सोनांचली के-“कौरव की इस भरी सभा में, चीर बढ़ाने वाले, मेरी रक्षा ख़ातिर अब वो, कृष्ण न आने वाले” तथा संतोष प्रीत की रचना अक्षरो का ले सहारा, हृदय के उद्गार लिखना ,कवि सम्मेलन को ऊँचाई प्रदान की Iसाधना शाही ने-हिंदी भाषा है आन हमारी,भारतीय इस पर हैं बलिहारी।I एवं दीपक दबंग ने जब रोजी – रोटी हिंदी होगी । हिंदी माथे की बिंदी होगी ,सुनाकर नई ऊर्जा सबमें भर दी I

अखलाक भारतीय की रचना- शौर्य पूर्ण बलिदान त्याग की मैं अद्भुत परिभाषा हूँ , मैं परमवीर चक्र हर सैनिक के जीवन की अभिलाषा हूँ,देश भक्ति सबमें जगा दिया I

गिरीश पांडेय की कविता-विदेशों में भारत की पहचान हिन्दी ,हमारे वतन के लिए शान ‌ हिन्दी,सुनाकर वाह वाही लूटी I डॉ. महेंद्र नाथ तिवारी अलंकार नेहिन्दी भवन के सामने हिन्दी खड़ी मिली,

मांँ भारती के पाँव में बेड़ी पड़ी मिली” सुनाकर

सबको हिंदी की दशा पर सोचने को मजबूर कर दिया I

चंद्रा साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि राम नरेश “नरेश” की रचना

“हिंदी बिंदी भारत माँ की” गीत सुनाकर कवि सम्मेलन को समापन की ओर पहुंचाए I

इन कवियों के साथ अन्य कवि जिनमें डॉ. वत्सला, उषा पांडेय, मधुलिका राय, सुषमा मिश्रा, संध्या मौर्या, जौनपुर से आईं संगीता मिश्रा और सविता राय, झरना मुखर्जी आदि कवियों/कवयत्रियों ने अपनी रचनाओं तथा गीत गजलों से इस सम्मेलन को सफल काव्य मय बना दिया I

समारोह में पत्रकार आनंद सिंह अन्ना, विशाल चौरसिया भी उपस्थित रहेI

इस अवसर पर के विशिष्ट सेवाओं के लिए और हिंदी के विकास में योगदान के लिए इस हिंदी दिवस समारोह पर सभी कवियों को प्रशस्ति पत्र तथा माल्यार्पण दकर चंद्रा हिंदी श्री सम्मान-2024 सेअलंकृत कियागयाI

अतिथि कवियों, पत्रकारों, समाज सेवियों सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. राम नरेश ‘नरेश’ ने कहा कि यह चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) आपका हैI आज ” हिंदी दिवस” पर अपनी साहित्यिक सेवाओं से राजभाषा को बढ़ावा देकर अपने देश के मस्तक को और ऊंचाई प्रदान कर हिंदी के प्रति समर्पित भाव से देश वासियों में हिंदी प्रेम जगाया है I

कार्यक्रम प्रभारी पूर्व वरिष्ठ राज भाषा अधिकारी डी डी यू रेलवे मंडल के श्री दिनेश चंद्र जी ने आज के परिवेश में हिंदी की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की I

अतिथि कवियो और आगन्तुकों के प्रति चंद्रा साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि इंजीनियर राम नरेश “नरेश ” ने आभार व्यक्त किया

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