Friday, August 29, 2025

लावारिस मिली महिला के परिजनों का नहीं लगा सुराग इंसानियत अभी जिंदा है

लावारिस मिली महिला के परिजनों का नहीं लगा सुराग

इंसानियत अभी जिंदा है

लावारिस महिला का सहारा बने सहदेव प्रताप सिंह

वाराणसी।
एक सप्ताह पहले वाराणसी डाफी नारायणपुर नेशनल हाईवे रोड के समीप लावारिस अवस्था में भूखी प्यासी महिला पड़ी हुई थी। पास के ही एक आहार विहार नामक ढाबा के कर्मचारी व मानवाधिकार सी डब्लू ए संस्था के नगर अध्यक्ष सहदेव प्रताप सिंह की नज़र उस महिला पर पड़ी महिला की सुरक्षा को देखते हुए लावारिस हालत में मिली महिला को ढाबा पर लाकर खाना-पीना खिलाकर उसका परिचय और उसके परिजनों का पता जानने की कोशिश किए। लावारिस महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए अपना नाम रानी देवी बताई वह औरंगाबाद झारखंड की रहने वाली है उसके दो बच्चे भी है। और उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। और घर से भगा दिया है। लावारिस महिला के परिजनों का पता न लगने तक उसको ढाबे पर ही सुरक्षित रखा गया था। परिजनों का कोई सुराग न मिल पाने पर सहदेव प्रताप सिंह ने सेटलर डायरेक्टर मनमानस रिहेबिलिटेशन फाउंडेशन ट्रस्ट वाराणसी संस्था की डायरेक्टर डॉली सिंह को पूरे मामले की जानकारी दी। आपको बता दें डॉली सिंह अपनी संस्था के माध्यम से मानसिक तौर पर लावारिस पड़े हुए लोगो की देख भाल करती है। इस पूरे मामले में डॉली सिंह का कहना था कि यह लावारिस महिला मानसिक तौर पर बीमार चल रही है और इसको इलाज की जरूरत है फिलहाल महिला की देखभाल के लिए एक सराहनीय कदम उठाते हुए सहदेव प्रताप सिंह और डॉली सिंह ने बिना देर किए डायल 112 पुलिस सहायता और 1090 महिला हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर लावारिस महिला की पूरी जानकारी दी पुलिस प्रशासन के साथ लावारिस महिला को जिला अस्पताल कपिल चौरा में भर्ती करवा दिया गया। वहीं उसके परिजनों की तलाश के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जहां पर सूबे की सरकार महिला सशक्तिकरण,महिला हेल्प डेस्क स्थापित कर बड़े-बड़े पोस्टर बैनर लगवा कर महिला सुरक्षा का ढिंढोरा पीटते हैं। इस घटना चक्र से यह साबित होता है कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था महिलाओं को लेकर सिर्फ अपना कोरम पूरा कर रहे है। और इस कानून व्यवस्था में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं। इस घटना चक्र से आपको पता चल ही गया होगा। सूबे की सरकार में महिला सुरक्षा की बात करे तो सिर्फ कागजों पर ही कानून व्यवस्था सिमट कर रह चुकी है। धरातल पर देखा जाए तो सब कुछ हवा-हवाई है।

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