वाराणसी: विकास खण्ड चिरईगांव में राज्य सरकार के “8 साल बेमिसाल” कार्यक्रम के तहत मुख्य अतिथि के तौर पर कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री महोदय विभागों के द्वारा लगाए गए स्टालों पर गए, जहां उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की और सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बी एन द्विवेदी भी उनके साथ मौजूद थे।
लेकिन वहीं दूसरी ओर, विकास खंड के एक जिम्मेदार अधिकारी एडीओ एसटी अपनी नींद पूरी कर रहे थे। यह बात खास है, क्योंकि उन्हें यह मालूम था कि आज कैबिनेट मंत्री का कार्यक्रम उनके विकास खंड में होने वाला है, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारी का बिल्कुल भी एहसास नहीं दिखा रहे थे।
इस पर सवाल यह उठता है कि राज्य सरकार अपने “8 साल बेमिसाल” के तहत जनता को अपनी उपलब्धियों से अवगत करवा रही है और सेवा, सुरक्षा, और सुशासन का दावा कर रही है। क्या यह सुशासन का ही उदाहरण है, कि एक मंत्री विकास खंड में आकर सरकार की योजनाओं का प्रचार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक जिम्मेदार अधिकारी बिना किसी उत्तरदायित्व के अपनी ड्यूटी से बेखबर सो रहा है?
यह घटना प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुशासन पर सवाल उठाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या ऐसे अधिकारियों के साथ राज्य सरकार अपने दावों को सही ठहरा सकती है।