Sunday, April 19, 2026
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बिजली आपूर्ति में बाधा डालने पर कर्मचारियों की सीधी बर्खास्तगी संभव, यूपी पावर कॉरपोरेशन ने बनाया सख्त नियम

 

लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में अब बिजली आपूर्ति में जानबूझकर बाधा डालने वाले बिजली कर्मियों को बिना किसी विभागीय जांच के सीधे सेवा से हटाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने इस आशय का विशेष नियम “विशेष नियम 7 (क)” के रूप में लागू किया है। यह प्रावधान कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) (पंचम संशोधन) विनियमावली-2025 के तहत जोड़ा गया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में 29 मई से विभिन्न विद्युत कर्मचारी संगठनों द्वारा अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा की गई है। इस प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने वैकल्पिक इंतजाम के साथ अब अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।

क्या है विशेष नियम 7 (क)?

नए नियम के अनुसार, यदि कोई बिजलीकर्मी विद्युत आपूर्ति प्रणाली में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करता है या उसका प्रयास करता है, तो उसे विभागीय जांच के बिना ही सीधे सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। यह नियम अभियंताओं से लेकर तकनीकी एवं अन्य सभी स्तरों के कर्मचारियों पर लागू होगा।

प्रबंधन की सख्ती, कर्मचारियों में असंतोष

प्रबंधन का कहना है कि प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति देना उसकी पहली प्राथमिकता है, और किसी भी तरह की अराजकता या असहयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं कर्मचारी संगठनों ने इस नियम को तानाशाही करार दिया है और चेतावनी दी है कि इससे आंदोलन और तीव्र हो सकता है।

संभावित कानूनी विवाद

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना विभागीय जांच के सीधी बर्खास्तगी का प्रावधान कानूनी विवादों को जन्म दे सकता है, क्योंकि यह कर्मचारियों के प्राकृतिक न्याय के अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।

निष्कर्ष

राज्य में बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर भी गरमाया रह सकता है।

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