चिरईगांव/वाराणसी।
पिछले पांच दिनों से चिरईगांव विकास खंड के एक दर्जन से अधिक गांव तेंदुए की दहशत में जी रहे हैं। खेतों में तैयार फल, फूल और सब्जियों की फसलें किसानों की आंखों के सामने सड़ रही हैं, लेकिन डर के मारे कोई भी खेतों की ओर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के हमले की आशंका के चलते रात-रात भर जागकर पहरा देना पड़ रहा है, जबकि दिन में भी लोग खेतों और बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता उन किसानों को है जिनकी आजीविका फूलों, सब्जियों और फलों की खेती पर निर्भर है।
ग्राम प्रधानों ने लगाई सुरक्षा की गुहार
गौराकलां (लखरांव) के ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने जिलाधिकारी कार्यालय में एडीएम नागरिक आपूर्ति अमित कुमार भारती को ज्ञापन सौंपकर तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग की लापरवाही अब किसानों पर भारी पड़ रही है।
किसानों की मदद में जुटे ग्रामीण, फिर भी नाकाम
गांव के लोगों ने स्वयं ड्रोन कैमरा, हेलमेट, डंडे और पिंजरे के लिए मुर्गा तक उपलब्ध कराया, लेकिन तेंदुए को पकड़ने में वन विभाग अब तक नाकाम रहा है। इससे ग्रामीणों में नाराज़गी है।
वन विभाग का दावा, ग्रामीणों का खंडन
वन विभाग का कहना है कि तेंदुआ जिस दिशा से गांव में आया था, उसी दिशा में लौट गया है। लेकिन ग्रामीण इस दावे पर भरोसा नहीं कर रहे। लखरांव, चांदपुर, तोफापुर और गौराकलां के कई किसानों ने हाल की रातों में तेंदुए को देखने का दावा किया है। अंबा रामपुर गांव में भी लोगों ने कहा कि वहां पर भी दिखाई दिया है उसके पद चिन्ह दिखाई पड़ रहे हैं
चांदपुर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संजय ने जब सोमवार रात तेंदुए को देखने की सूचना पुलिस को दी तो थाना प्रभारी जगदीश कुशवाहा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को अफवाहों से सावधान रहने को कहा। बावजूद इसके, दहशत अब भी कायम है।
नुकसान लाखों में, समाधान अधर में
किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही तेंदुए को पकड़ा नहीं गया और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं हुए, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
संभावित अगला कदम:
ग्रामीण प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अगर वन विभाग और प्रशासन ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन की चेतावनी भी दी जा सकती है।