कैसा होगा यू.पी विधान सभा 2027 का चुनाव
काली शंकर उपाध्याय की कलम से ✒️
उत्तर प्रदेश में इसी समय से ही विधान सभा चुनाव की सरगर्मियां बहुत तेजी बढ़ रही है, लिहाजा इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इतनी पहले से चुनावी सरकार में अगर उत्तर प्रदेश में बढ़ रही है तो प्रदेश में विधानसभा 2027 का चुनाव कैसा होगा.
नेता क्या करेंगे ::::::
जिन नेताओं के अंदर कोई काबिलियत नहीं रहेगी वह बहुसंख्यक समाज के लोगों की पक्ष धारी करते हुए अल्पसंख्यक समाज को अपने निशाने पर लेंगे जिस तरह से इस समय उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक स्वर्ण समाज के लोगों को अपनी निशाने पर लेकर बहुसंख्यक वोट बैंक के पीछे सारी पार्टियां भाग रही हैं, हालांकि इस तरह की और राजनीति भविष्य के लिए और समाज के लिए एक जहर साबित होगी लेकिन जनता इस बात को नहीं समझ रही है और जात-पात में लगातार बट रही है अपनी जात का वर्चस्व दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश में लगातार जदोहद लगा हुआ है, 2027 आते-आते जात-पात में इतना बढ़ दिया जाएगा कि एक आदमी दूसरे आदमी को देखने से भी कतराता हुआ नजर आएगा बहुत सोचने वाली बात यह है कि इस समय जब हम 2025 जैसे समय में जी रहे हो और जात-पात जैसे छोटी चीजों में बढ़कर नेताओं को कुर्सी तक का रास्ता दिखाने का मूर्खताना रवैया अपना रहे है , और क्या सही होगा, लेकिन पढ़े-लिखे लोग पढ़ा लिखा समाज भी आज इस जहर का शिकार बनता चला जा रहा है और इसके मुख्य कारण है हमारे माननीय नेताजी लोग चुनाव आते-आते हर समाज के लोग एक दूसरे से इतनी बाटेंगे जितना कि किसी भी राज्य जात पात के नाम पे न बटे हो उत्तर प्रदेश में यह पहला ऐसा चुनाव होगा जिसमें लोग जात-पात उच्च नीच देख के वोट करेंगे जिसका फायदा उन नेताओं को सीधे पहुंचेगी जो जात-पात को सीढ़ी बनाकर सत्ता के कुर्सी पर बैठना चाहते हैं, हालांकि ऐसा क्यों ना हो उत्तर प्रदेश की जनता में नेताओं ने इतना जहर जो घोल के रखा है. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी दूसरी तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और बहुत सारी ऐसी पार्टी हैं जो की एकजुट होकर चुनाव लड़ सकते हैं चुनाव में बहुत सारे फेरबदल भी होंगे जिसमें कुछ नेता इस पार्टी से उसे पार्टी में और कुछ नेता उसे पार्टी से इस पार्टी में भी जाएंगे हालांकि यह कोई नई चीज नहीं चुनाव 2027 का सभी पार्टियों के लिए भी एक सबक साबित हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश में इस समय इस समय जिस तरीके से फूट डालो राज करो कि राजनीति चल रही है और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या इस राजनीति का शिकार भी हो रहा है,
*क्या चाहते है नेता* ?
नेता सत्ता की गलियारों में पहुंचने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं चाहे वह आम जनता को किसी भी प्रकार का नुकसान हो इससे सत्ता की मलाई काट रहे या सत्ता पाने की इच्छा रखने वाले नेताओं को फर्क नहीं पड़ता हालांकि इस समय उत्तर प्रदेश का माहौल नेताओं ने मिलकर इस कदर खराब कर दिया है कि आम जनमानस जातियों में बटकर एक दूसरे को दुश्मनी की भावना से देख रहा है और अपनी जात का वर्चस्व बनाने में जुटा है,
*युवाओं पर पड़ता प्रभाव*
इस मल्टीमीडिया के जमाने में जहां हर एक नौजवान के पास 5G मोबाइल है तो वहीं हर नौजवान पढ़ाई लिखाई के पीछे ना भाग कर नेताओं के बोई हुई जहर का शिकार होता चला जा रहा है, हर युवा अपनी जाति का वर्चस्व बनाने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर डाल रहा है और अपने आप को बहुत बड़ा राजनीतिज्ञ और डॉन समझ रहा है लेकिन इसमें फायदा सिर्फ और सिर्फ उन नेताओं का है जो समाज में सत्ता की गलियारे में जाने के लिए तमाम तरह के समाज में आग बोए पड़े हैं, इस समाज में युवा वर्ग बेरोजगारी की तरफ और गैंगवार में व्यस्त है, जिससे कि तमाम परिवार गरीबी का शिकार होते चले जा रहे हैं,