चिरईगांव/वाराणसी।
स्थानीय विकास खण्ड के ढाब क्षेत्र में गंगा की बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बाढ़ का पानी अब तेजी से बस्तियों और खेतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। मक्का, हरे चारे और सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को रामपुर गांव की अनुसूचित जाति बस्ती के निवासी गुलाब, लालजी और गुल्लू के घर चारों ओर से पानी से घिर गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुँची नायब तहसीलदार सुरेखा वर्मा ने तीनों परिवारों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक विद्यालय रामपुर में बनाए गए राहत शिविर में पहुँचाया। इन परिवारों के साथ उनकी 9 पालतू बकरियों की भी शिविर में देखभाल की व्यवस्था की गई है।
इस बीच पशुपालन विभाग द्वारा भी सक्रियता दिखाते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 214 पशुओं का एचएस रोग से बचाव हेतु टीकाकरण और डिवर्मिंग की प्रक्रिया पूरी की गई। पशुचिकित्साधिकारी डॉ. आर.ए. चौधरी ने बताया कि इस क्षेत्र में पशुओं को बाढ़जनित बीमारियों से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
उपजिलाधिकारी सदर अमित कुमार ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र की समस्याओं का संकलन किया जा रहा है और राहत व बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
वहीं रामपुर के निवासी संजय यादव और विजय कुमार का घर भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है। हालांकि प्रशासन ने उन्हें भी राहत शिविर में जाने को कहा, लेकिन डेढ़ दर्जन भैंसों और गायों को छोड़ना उनके लिए संभव नहीं हो पाया, जिस कारण वे देर शाम तक राहत शिविर नहीं पहुँच सके।
बाढ़ की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। प्रशासन द्वारा राहत कार्य लगातार जारी है, लेकिन बाढ़ की रफ्तार को देखते हुए आगामी दिनों में चुनौती और भी बढ़ सकता हैँ