Thursday, February 26, 2026

24 लाख 40 हजार रुपये बरामद, लेकिन जीआरपी इंस्पेक्टर अनभिज्ञ! सवालों से बचते नजर आए अधिकारी — जांच में जुटी टीमें

 

24 लाख 40 हजार रुपये बरामद, लेकिन जीआरपी इंस्पेक्टर अनभिज्ञ! सवालों से बचते नजर आए अधिकारी — जांच में जुटी टीमें

 

चंदौली। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस से एक युवक के पास से 24 लाख 40 हजार रुपये नकद बरामद हुए। जीआरपी ने संदिग्ध हालात में पकड़े गए युवक को हिरासत में लिया, जिसने अपना नाम घनश्याम वर्मा निवासी मऊ बताया। लेकिन मामला तब और उलझ गया जब खुद जीआरपी इंस्पेक्टर एस.के. सिंह गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी से जुड़ी अहम जानकारियों से अनभिज्ञ नजर आए।

 

सूत्रों के मुताबिक, रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने ट्रेन से उतरते समय युवक की हरकतों को संदिग्ध पाकर तलाशी ली। बैग की जांच में लाखों रुपये मिले, जिसके बाद पूछताछ शुरू हुई। लेकिन घनश्याम वर्मा धन के स्रोत और गंतव्य के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

 

दोपहर में जब इंस्पेक्टर एस.के. सिंह ने थाने पर प्रेस वार्ता बुलाई, तो पत्रकारों के सवालों पर वे असहज नजर आए। यह तक नहीं बता पाए कि युवक को किस प्लेटफॉर्म से पकड़ा गया या वह मऊ के किस क्षेत्र का निवासी है। लगातार सवालों के बीच इंस्पेक्टर ने केवल इतना कहा कि “मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियों को सूचना दे दी गई है”।

 

उनके अस्पष्ट जवाबों ने न केवल पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दिखाया कि बिना पूरी तैयारी के मीडिया के सामने मामला लाना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान छोड़ गया।

 

स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि इतनी बड़ी नकदी मिलने पर पुलिस को पहले धन के स्रोत, उपयोग और संभावित लिंक की जानकारी जुटानी चाहिए थी, उसके बाद ही सार्वजनिक बयान देना चाहिए।

 

फिलहाल, जीआरपी ने मामला आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों को सौंप दिया है। जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम किसी वैध व्यावसायिक सौदे से जुड़ी थी या किसी अवैध गतिविधि का हिस्सा। वहीं, इस प्रकरण ने विभागीय समन्वय और पेशेवर दक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंदौली से शिवम् विश्वकर्मा : की रिपोर्ट 

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