Thursday, February 26, 2026

गो-तस्करी पर पुलिस की सख्त दस्तक: सुरक्षा और सजगता का नया संकल्प हाल के दिनों में अपराध के बदलते स्वरूप और गो-तस्करी की बढ़ती घटनाओं ने कानून व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां

वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में एडिशनल सीपी (अपराध) राजेश कुमार सिंह का दौरा न केवल पुलिस बल के लिए एक चेतावनी है, बल्कि समाज में सुरक्षा का भरोसा जगाने वाला एक कड़ा कदम भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गो-तस्करी जैसे जघन्य अपराधों में संलिप्त अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

बभनपुरा घटना: लापरवाही का सख्त सबक

इस कड़ाई की तात्कालिक वजह रिंग रोड के बभनपुरा पुल पर हुई एक दुखद घटना बनी। एक गो-तस्करी में संलिप्त वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से तीन गोवंशों की मृत्यु हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना न केवल पशु क्रूरता का उदाहरण है, बल्कि उस मार्ग पर पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल उठाती है।

जांच में ड्यूटी के प्रति शिथिलता पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। चौबेपुर थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर करना इस बात का प्रमाण है कि अब केवल अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। यह संदेश साफ है: सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर सेंध स्वीकार्य नहीं है।

गश्त और तकनीकी निगरानी की आवश्यकता

एडिशनल सीपी ने रिंग रोड से लेकर बभनपुरा पुल तक के संवेदनशील इलाकों में गश्त (Patrolling) बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गो-तस्करी को रोकने के लिए पुलिस को निम्नलिखित रणनीतियों पर काम करना होगा:

* रणनीतिक चेकपोस्ट: रिंग रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर अचानक चेकिंग और मोबाइल बैरियर का उपयोग।

* खुफिया तंत्र की मजबूती: स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय करना ताकि तस्करी के मार्गों और समय की पूर्व जानकारी मिल सके।

* रात्रि गश्त में तेजी: अधिकांश तस्करी की घटनाएं रात के अंधेरे में होती हैं, अतः ‘नाइट विजन’ उपकरणों और बढ़ी हुई पुलिस उपस्थिति की आवश्यकता है।

* त्वरित कार्रवाई: तस्करी की सूचना मिलते ही रेस्पॉन्स टाइम को कम करना।

समाज और प्रशासन का साझा दायित्व

गो-तस्करी केवल एक पुलिसिया समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करती है। जब पुलिस प्रशासन सख्त होता है, तो असामाजिक तत्वों में भय व्याप्त होता है। बभनपुरा की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तस्करों के दुस्साहस को तोड़ने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति ही एकमात्र विकल्प है।

अपर पुलिस आयुक्त के निर्देशों ने यह सुनिश्चित किया है कि अब रिंग रोड के हर मोड़ पर पुलिस की पैनी नजर होगी। अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर ‘गैंगस्टर एक्ट’ जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि इसे जड़ से मिटाया जा सके।

चौबेपुर में पुलिस प्रशासन की यह सक्रियता एक स्वागत योग्य कदम है। थानाध्यक्ष पर हुई कार्रवाई ने विभाग के भीतर जवाबदेही तय की है, वहीं गश्त बढ़ाने के निर्देश ने तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की नींव रखी है। यदि गश्त में निरंतरता और ईमानदारी बनी रही, तो निश्चित रूप से रिंग रोड और आसपास के क्षेत्र इन अवैध गतिविधियों से मुक्त हो सकेंगे।

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