
चिरईगांव, वाराणसी।प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं वाराणसी के विकास खण्ड चिरईगांव अंतर्गत ग्रामसभा चांदपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ अधिकारियों के आदेश और सामान की उपलब्धता के बावजूद ‘प्रधान पति’ (प्रतिनिधि) के अड़ियल रवैये के कारण ट्री-गार्ड नहीं लग पा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हिमांशु नागपाल ने बारिश के मौसम में लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी ग्राम प्रधानों को ट्री-गार्ड लगवाने के सख्त निर्देश दिए थे। इसी क्रम में ग्रामसभा चांदपुर की सचिव चांदनी सिंह ने ट्री-गार्ड की जालियां तो मंगवा लीं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी वे धरातल पर नहीं लग सकीं।
सचिव के पास सबूत, प्रतिनिधि का इनकार
मामले की पड़ताल करने पर सचिव चांदनी सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए समय पर सामान उपलब्ध करा दिया था। उन्होंने अपने व्हाट्सएप (WhatsApp) चैट का हवाला देते हुए दिखाया कि उन्होंने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संजय सोनकर को बार-बार ट्री-गार्ड लगवाने के लिए संदेश भेजे और आग्रह किया, लेकिन प्रतिनिधि ने इसे लगातार दरकिनार कर दिया।
दूसरी ओर, जब हमारी टीम ने प्रधान प्रतिनिधि संजय सोनकर से इस देरी का कारण पूछा, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सारा दोष सचिव पर मढ़ दिया। यह स्थिति तब है जब सचिव के पास डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं कि वे लगातार कार्य पूर्ण करने का दबाव बना रही थीं।
विकास कार्य ठप, जनता में रोष
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सचिव और प्रधान प्रतिनिधि के बीच की इस आपसी खींचतान और ‘क्रेडिट की राजनीति’ के कारण गांव का विकास बाधित हो रहा है। बिना ट्री-गार्ड के लगाए गए पौधों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे सरकारी धन की बर्बादी तय मानी जा रही है।
बड़ा सवाल: क्या उच्च अधिकारी इस आपसी तालमेल की कमी और लापरवाही का संज्ञान लेंगे? क्या उन जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई होगी जो सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर विकास कार्यों में बाधा बन रहे हैं





