Friday, August 21, 2026
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रामचंदीपुर विद्यालय प्रकरण: बीमार रसोइया और बेपरवाह सफाई कर्मी, बच्चों के हाथों में झाड़ू के पीछे की असली कहानी

रामचंदीपुर विद्यालय प्रकरण: बीमार रसोइया और बेपरवाह सफाई कर्मी, बच्चों के हाथों में झाड़ू के पीछे की असली कहानी

चिरईगांव, वाराणसी।रामचंदीपुर कंपोजिट विद्यालय में बच्चों से झाड़ू लगवाने के वायरल वीडियो के पीछे की परतें अब खुलने लगी हैं। इस मामले में जहाँ एक तरफ पत्रकार द्वारा ₹10,000 की अवैध मांग का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत के सफाई कर्मियों (श्यामसुंदर और राजू) की भारी लापरवाही भी उजागर हुई है।

सफाई कर्मियों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे बच्चे

स्थानीय सूत्रों और विद्यालय प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर की सफाई की जिम्मेदारी सफाई कर्मी श्यामसुंदर और राजू की है। ग्रामीणों और स्टाफ का आरोप है कि:

ये सफाई कर्मी कभी भी निर्धारित समय पर विद्यालय नहीं पहुँचते।

  1. अक्सर केवल बाहर-बाहर से सफाई की औपचारिकता पूरी कर चले जाते हैं।

विद्यालय के अंदरूनी हिस्सों और कमरों की सफाई न होने के कारण व्यवस्था चरमरा गई है।

घटना वाले दिन भी सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण ही रसोइया चन्द्रा देवी (जो स्वयं बीमार थीं) को कचरा साफ करना पड़ा, जिसमें छात्रा शिवानी शर्मा ने उनकी मदद की।

मदद को बनाया ‘बाल श्रम’ का ढाल

छात्रा शिवानी शर्मा ने बताया कि सफाई कर्मियों के न आने और रसोइया की तबीयत खराब होने के कारण उसने स्वेच्छा से झाड़ू उठाई थी। इसी स्थिति का फायदा उठाकर एक पत्रकार ने वीडियो बनाया और सच्चाई जानने के बावजूद इसे गलत तरीके से पेश किया। प्रधानाध्यापक संतोष राम का आरोप है कि जब उन्होंने पत्रकार से बात की, तो उसने मामले को रफा-दफा करने के लिए ₹10,000 की मांग की।

दोहरा संकट: ब्लैकमेलिंग और लापरवाही

यह मामला अब केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि दो बड़े मुद्दों को दर्शाता है:

सफाई कर्मियों की ड्यूटी में चोरी: श्यामसुंदर और राजू जैसे कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बच्चों को सफाई जैसे कार्यों में हाथ बंटाना पड़ रहा है।

पीत पत्रकारिता (Yellow Journalism): खबर की तह तक जाने के बजाय उसे उगाही का जरिया बनाना।

विद्यालय प्रशासन और जागरूक अभिभावकों ने अब जिला प्रशासन और खंड शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि:

सफाई कर्मी श्यामसुंदर और राजू के खिलाफ समय से ड्यूटी न करने पर विभागीय कार्रवाई की जाए।

ब्लैकमेलिंग करने वाले पत्रकार के विरुद्ध रंगदारी का मुकदमा दर्ज हो।

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