बड़ा खुलासा: दिन में ‘गुरुजी’ रात में ‘झोलाछाप’, क्या मरीजों की जान की कीमत पर फल-फूल रहा है यह काला कारोबार?
मामला भीषम पुर से: शिक्षा के मंदिर से लेकर जीवन रक्षक क्लीनिक तक, भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक ऐसा कॉकटेल तैयार हुआ है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। मामला अखोरवा क्षेत्र का है, जहाँ एक शिक्षा मित्र अपनी दोहरी भूमिका से न केवल विभाग को चूना लगा रहा है, बल्कि मासूम मरीजों की जिंदगी को भी दांव पर लगा रहा है।
दोपहर 4 बजे के बाद बदल जाता है चोला
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कैलाश राम जो कि अखोरवा में शिक्षा मित्र के पद पर तैनात हैं, उनका असली ‘खेल’ स्कूल की घंटी बजने के बाद शुरू होता है। शाम 4 बजे के बाद गुरुजी अपनी ‘फर्जी डॉक्टरी’ की दुकान सजा लेते हैं। बिना किसी वैध डिग्री या अनुभव के, कैलाश राम धड़ल्ले से मरीजों का ‘इलाज’ कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: जो व्यक्ति दिन में बच्चों को ककहरा सिखाता है, वह शाम को स्टेथोस्कोप लगाकर लोगों की जान से खिलवाड़ करने का हकदार कैसे बन गया?
BSA और CMO की ‘रहस्यमयी’ खामोशी
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल की जानकारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) दोनों को होने की चर्चा है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक ‘शून्य’ ही हासिल हुआ है।
क्या यह मिलीभगत है? जनता के बीच चर्चा आम है कि बिना उच्च अधिकारियों के संरक्षण के, कोई भी कर्मचारी इतनी निडरता से अवैध क्लीनिक नहीं चला सकता।
नियमों की धज्जियाँ: एक सरकारी कर्मचारी (शिक्षा मित्र) किसी दूसरे व्यवसाय में संलिप्त नहीं हो सकता, फिर यहाँ तो सीधे-सीधे ‘मौत की दुकान’ चल रही है।
मरीजों की जान के साथ खिलवाड़
झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इंजेक्शन और गलत दवाओं की वजह से आए दिन बड़ी घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में कैलाश राम जैसे लोग न केवल स्वास्थ्य विभाग की साख पर बट्टा लगा रहे हैं, बल्कि किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।
हमारा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? या फिर ‘ऊपर तक’ पहुंच की वजह से गुरुजी के इस खूनी खेल पर पर्दा डाला जा रहा है?
संवाददाता ~ परीक्षित उपाध्याय






