वाराणसी
अनादि काल से धर्म, साधना और लोक कल्याण की धारा जोया वाली काशी में, काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के पवित्र दरबार में इस वर्ष के होली मिलन समारोह में एक अद्भुत भावना प्रकट हुई। यह समारोह केवल जातीयता का उत्सव नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के लिए शांति, दीक्षा और धर्म-संरक्षण का एक सामूहिक संकल्प बन गया।
पंडित शिष्य पंडित (कल्लू महाराज), उपमहंत प्रमुख मंदिर काशी के सान्निध्य में पुजारी इस दिव्य समारोह में अंतर्राष्ट्रीय धर्मगुरु श्री श्री संघ सहित बड़ी संख्या में अनुयायियों की उपस्थिति ने पर्यावरण को और भी ऊर्जामय बनाया। भक्तों ने एक स्वर में बाबा कालभैरव के श्रीचरणों में प्रार्थना की कि सभी बाधाएं दूर हों, अधर्म का नाश हो और विश्व में शांति का प्रकाश हो।
वर्तमान विश्वव्यापी पोलैंड और युद्ध के विभीषी वैज्ञानिकों के बीच, यह कार्यक्रम मानो एक आध्यात्मिक उत्तर कोरिया की ओर से आयोजित किया गया। विशेष पूजा- अलौकिक, दिव्य आरती और अलौकिक मूर्ति के माध्यम से शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया गया। मंदिर परिसर भक्ति-रस और रंग के उल्लास से साराबोर हो उठा, जहां हर एक आस्था के रंग में रंगा दिखाई दिया।
एकता और भाईचारे के रंग में रंगने का संदेश भी नहीं दिया गया। हर हृदय से यही प्रार्थना है कि बाबा कालभैरव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो।
इस अवसर पर पंडित मठाधीश ने कहा कि काशी की सनातन परंपरा में हमेशा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के भाव को महत्व दिया जाता है। यहां होने वाले ऐसे धार्मिक कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम हैं।
इस प्रकार, कालभैरव दरबार में यह होली मिलन उत्सव मनाया गया, रंग से उग्र आत्मा को स्पर्श करने वाला, शांति और सौहार्द का दिव्य संदेश दिया गया।
✍️ UP 18 NEWS से आशीष मोदनवाल की रिपोर्ट





