
शहाबगंज: विपणन निरीक्षक की मनमानी से किसान बेहाल, ‘खास’ लोगों का ही खरीदा जा रहा गेहूं
शहाबगंज (चंदौली)। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन किसानों के दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ब्लॉक शाहबगंज में तैनात विपणन निरीक्षक (Marketing Inspector) की कार्यशैली ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि हाड़-तोड़ मेहनत कर फसल उगाने वाला अन्नदाता आज बिचौलियों और करप्ट अधिकारियों की चौखट पर दर-दर भटकने को मजबूर है।
चिन्हित किसानों पर मेहरबानी,
आम किसान परेशान
क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि शाहबगंज ब्लॉक में गेहूं की खरीद निष्पक्ष रूप से नहीं हो रही है। विपणन निरीक्षक द्वारा केवल ‘चिन्हित’ किसानों का ही गेहूं खरीदा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो केंद्र पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जो किसान अधिकारियों की ‘खास शर्तों’ को पूरा कर रहे हैं, उनका गेहूं प्राथमिकता पर तौला जा रहा है, जबकि आम किसान अपनी बारी का इंतजार करते-करते थक चुके हैं।
घटिया किस्म का बहाना और अवैध वसूली की चर्चा
पीड़ित किसानों का कहना है कि जब वे अपनी फसल लेकर केंद्र पर पहुंचते हैं, तो अधिकारी फसल को ‘बेकार’ या ‘घटिया किस्म’ का बताकर रिजेक्ट कर देते हैं।
”महीनों की खून-पसीने की मेहनत के बाद जब अधिकारी हमारी फसल को रद्दी बताते हैं, तो कलेजा फट जाता है। लेकिन वही फसल तब स्वीकार कर ली जाती है जब सुविधा शुल्क की बात होती है।” – एक व्यथित किसान
सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आ रही है कि विपणन निरीक्षक द्वारा गेहूं खरीद के बदले अवैध धनराशि (पैसे) की डिमांड की जा रही है।
प्रकृति की मार और अब अधिकारियों का प्रहार
इस वर्ष किसान पहले ही मौसम की बेरुखी और प्राकृतिक आपदा से फसल के नुकसान का दंश झेल रहे हैं। ऐसे संकट के समय में जिम्मेदार अधिकारियों का मौन रहना और किसानों का शोषण करना प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश हैं कि किसानों को कोई असुविधा न हो, लेकिन शाहबगंज में इन आदेशों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।
प्रमुख बिंदु:
आदेशों की अवहेलना: जिला अधिकारी और मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा।
भ्रष्टाचार का आरोप: विपणन निरीक्षक पर अवैध वसूली और पक्षपात के गंभीर आरोप।
मानसिक उत्पीड़न:
फसल को घटिया बताकर किसानों को हतोत्साहित करना।
किसानों की मांग:
तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन ‘बेलगाम’ अधिकारियों पर कब नकेल कसता है और शाहबगंज के किसानों को उनका जायज हक कब मिलता है।





