#आदर्श_पुरुष
प्रस्तुत चित्र भारत की संसद का है । संसद के अंदर सेंट्रल हाल के बाहर यह प्रतिमा महामानव जयप्रकाश नारायण जी का है । भारतीय इतिहास में लोकनायक शब्द पहली बार इसी महामानव के लिए प्रयोग हुआ था । लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी किसी भी संवैधानिक दायित्व पर नही रहे । उन्होंने सम्पूर्ण जीवन सच्चे लोकतंत्र की स्थापना एवं व्यक्तित्व निर्माण को समर्पित किया था ।
“भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।” सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान उन्होंने श्रीमती इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए किया था।
लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है— राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।
ऐसे महामानव की पुण्यतिथि पर सादर नमन करता हूँ ।





