हमनें कभीं गुलामी स्वीकार नहीं किया : रमेश जी
——1498 से लेकर 1947 तक रहा एक लंबा संघर्ष
भोलानाथ मिश्र
सोनभद्र । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत के प्रचारक रमेश जी शुक्रवार को स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव अभियान के ‘अमृत तत्व’ की तथ्यात्मक व्याख्या से सभा में उपस्थित प्रबुद्ध जनों को मंत्रमुग्ध करने में सफल रहे । नगर स्थित तहसील परिसर में नागरिकों को संबोधित
करते हुए उन्होंने कहा कि हमने कभी गुलामी स्वीकार नही किया । यह हमारे देश का स्वाभिमान है । हमारा गौरवशाली स्वर्णीय इतिहास है जिसका 1498 से लेकर 1947 तक का एक लंबा संघर्ष है । आक्रांताओं का एक -एक कर उल्लेख करते हुए कटाक्ष किया ,
‘पता नहीं कहाँ हैं वे, अतीत में समा गये ,
काल के प्रवाह में ,निज को भी मिटा गये’ ।
उन्होंने कहा देश के कोने- कोने में , कण-कण में इस जिले में भी देश को स्वतंत्र कराने के लिए हर व्यक्ति के हृदय में ज्वाला धधक रही थी । चंद्रगुप्त मौर्य , झाँसी की रानी , छत्रपति शिवाजी
महाराज , पृथ्वीराज चौहान , महाराणा प्रताप , चन्द्र शेखर आज़ाद , भगत सिंह , मंगल पांडेय , सुभाष चन्द्र बोस , चित्तू पाण्डेय समेत अनगिनत देश भक्तों ने जो संघर्ष किया उसे चाटुकार इतिहासकारों
ने भुला दिया ।
महापुरुषों को वह महत्व नही दिया जिसके वे हकदार थे । औरंगजेब और अकबर को वह स्थान दिया गया जो स्थान राणा प्रताप और शिवाजी महाराज को दिया जाना चाहिए था । इतिहास के इसी सच को समाज के सामने लाने का यह अवसर है ‘अमृत महोत्सव’ ।
कहां जिन लोगों ने स्वराज स्थापित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी और अपना सब कुछ देश को स्वतंत्र कराने में न्योछावर कर दिया था ,उन्हें और उनके योगदान को प्रकाश में लाना ही अमृत महोत्सव है । साहित्यकारों ,कलाकारों ,
पूज्य संतो , किसानों ,
श्रमिकों , वकीलों और
लाखों लाख जो बलिदान
दिये हैं ,उस सच को जनता को बताना ही अमृत है ।
रमेश जी ने कहा कि 1947 में हमें ‘स्वतन्त्रता’ के स्थान पर ‘स्वाधीनता’ मिली थी । वह भी एक परिवार और व्यक्ति को ही इसका श्रेय दिया गया ,जबकि इसमें पूरे समाज का योगदान था । उन्होंने सवाल किया कि
क्या हम चौरी- चौरा,काकोरी
और बंग -भंग जैसी घटनाओं को भूल सकते है ? गौरवशाली अतीत का उल्लेख करते हुए कहा
की आम जनता ने 1905 में बंगाल विभाजन के प्रस्ताव का प्रबल विरोध शुरू कर दिया था। जन आक्रोश से घबड़ाकर ही अंग्रजों ने 1911 में उस प्रस्ताव को वापस ले लिया था ।
बिडंबना देखिए एक व्यक्ति व एक परिवार की सत्ता की भूख , प्रधानमंत्री बनने की लालच ने 1947 में देश
का विभाजन करा दिया । यदि 1947 में एक व्यक्ति के कारण झुके न होते तो आज देश की सीमा कुछ और ही रही होती । इस कटु सच को बताना स्वतंत्रता का अमृत है। भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ रहे जनरल विपिन रावत समेत 13 अन्य देश भक्तों की हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुए निधन को देश की अपूरणीय छति बताते हुए उन्होंने कहा , ‘जहाँ पूरा देश इस दुःखद घटना से शोकमग्न था ,वही कुछ लोग खुश थे । ये देश के गद्दार
हैं । ऐसे लोगों के चहरे बेनकाब होने चाहिए । ऐसी मानसिकता , कुत्सित सोच , देश विरोधी विचार धारा का प्रबल विरोध होना चाहिए ।
प्रान्त प्रचारक यह कहना नही भूले की यदि बापू आज जीवित होते तो उन्हें यह चाटुकारिता पसंद न आती की ‘दे दी हमें आज़ादी
बिना खड्ग बिना ढाल’ । उन्होंने सभा स्थल पर खचा -खच भरे प्रबुद्ध जनों का आह्वान किया कि देश परतंत्र न होने पाये इसलिए लोगों में
देश भक्ति जगाएं। उन्होंने कहा इस तरह के वायु
मण्डल खड़ा करने के उद्देश्य से स्वतन्त्रता का अमृत महोत्सव आयोजित किया जा रहा है । इसमें ‘स्व ‘की पहचान बनानी है ।
‘स्व’भाष , स्वदेशी , स्वावलंबन , स्व के स्वाभिमान की गौरवशाली
इतिहास की प्रतिष्ठा हमें करनी है । तमाम अज्ञात राष्ट्र भक्तों के त्याग , बलिदान को याद करने के लिए अमृत महोत्सव का आयोजन हो रहा है ।
Up18news se chandramohan Shukla ki report