Friday, August 29, 2025

वर्षों से कुंडली मारकर बैठे मलेरिया निरीक्षक का हो स्थानांतरण: नीतीश चतुर्वेदी

वर्षों से कुंडली मारकर बैठे मलेरिया निरीक्षक का हो स्थानांतरण: नीतीश चतुर्वेदी

डीएम को लिखा पत्र आरोपित मलेरिया निरीक्षक का स्थानांतरण नहीं तो होगा आमरण अनशन!

सोनभद्र। जनपद में तैनात मलेरिया निरीक्षक की भ्रष्टाचार में संलिप्तता की जांच एवं स्थानांतरित किये जाने की मांग अब तेज पकड़ने लगी है। युवा समाजसेवी नीतीश कुमार चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी को लिखें अपने पत्र में कहा है कि आदिवासी बाहुल्य एवं प्रदेश के अति पिछड़ा जनपद सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग में पिछले 17 वर्षों से एक ही जिले में कुंडली मारकर बैठे मलेरिया निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह अपने कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व के प्रति लापरवाह रहे हैं। वे अपने क्षेत्र में कभी नही आते है और न ही उनके द्वारा मलेरिया संचारी रोग डेंगू एवं वेक्टर बोर्न डिजीज से सम्बंधित कार्य ही किया जाता है।
श्री चतुर्वेदी आगे यह भी कहते हैं कि पिछले माह में म्योरपुर ब्लाक के मकरा सिंदूर में 50 से अधिक मौतें हो चुकी है एवं 100 से अधिक लोग जिला अस्पताल एवम जनपद के विभिन्न हॉस्पिटलों सहित बीएचयू वाराणसी तक एडमिट रहे है। जब मलेरिया निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह सीएमओ के साथ क्षेत्र में गए तो वहां के ग्रामीणों ने इनको दौड़ा लिया था । पिछले दिनों इन्ही के कार्यक्षेत्र के एक स्टोर में इनके द्वारा रखी गयी 34 बोरी एक्सपायर डीडीटी पाई गई थी, जिसकी जांच तहसीलदार एवं सदर एसडीएम द्वारा की गई । उक्त डीडीटी छिड़काव हेतु रखी गयी थी परंतु मलेरिया निरीक्षक के अपने क्षेत्र में न जाने के कारण वह डीडीटी एक्सपायर हो गयी एवं छिड़काव का फर्जी बिल बनाकर भुगतान भी करा लिया गया। तहसीलदार ने इसकी रिपोर्ट तत्कालीन जिलाधिकारी को दे दी लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई। इतना ही नहीं मलेरिया निरीक्षक के खिलाफ शासन द्वारा कई बार जांच कराया गया परंतु जांच को दबा दिया गया।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता नीतीश कुमार चतुर्वेदी ने मलेरिया निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि मलेरिया निरीक्षक अपने क्षेत्र में न जाकर सीएमओ के आवास से ही अपना कार्यालय चलाते है और कर्मचारियों अधिकारियों का ट्रांसफर,पोस्टिंग,बाजार मूल्य से अधिक दर पर सामानों का क्रय,भंडारण एवं बिलों का सत्यापन स्वयं ही करने का काम करते है। साथ ही ट्रेजरी में बिल लगाने का कार्य भी स्वयं इनके द्वारा ही किया जाता है। हाल ही में जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर नेम सिंह के दो वर्षों 2017-2019 का वेतन लगभग 63 लाख बिना शासन के स्वीकृत किये आहरित कर लिया गया। जिसकी कई बार शिकायत के बावजूद भी कोई जांच नही की गई। जब इनसे पूछा जाता है कि आप अपने कार्यक्षेत्र में क्यो नही जाते है तो कहते है कि मेरी पहुंच ऊपर तक है और सीएमओ साहब ने मुझे अपने बंगले पर लगा रखा है । आरोप तो यह भी है कि सीएमओ साहब के खुली वरदहस्त पर यह खुलेआम जनपद में स्वास्थ्य कर्मियों का शोषण करते है।इनके द्वारा कहा जाता है कि स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कार्य होता है तो सीडीओ और डीएम मुझे ही फ़ाइल लेकर बुलाते है।
मलेरिया निरीक्षक सभी खरीददारी अपने चहेते फर्म श्रीबालाजी इंटरप्राइजेज लखनऊ और उन्ही के कई फर्मों से कोटेशन के माध्यम से क्रय करते है उदाहरण के तौर पर मलेरिया कार्ड रु 86.24 टायफाइड कार्ड रु 89.60 डेंगू कार्ड रु 369.60 आदि बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर पर क्रय किया गया। उपरोक्त के संदर्भ में कई बार शिकायत की गई परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई,जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
श्री चतुर्वेदी ने डीएम को लिखे पत्र में जांचोपरांत न्यायोचित कार्यवाही करने की माँग करते हुए कहा कि विगत 5 माह में अब तक दर्जन भर से अधिक शिकायतों के बावजूद भी कोई न्यायोचित कार्यवाही नही हुई ।अगर एक सप्ताह के भीतर कोई न्यायोचित कार्यवाही नही हुई तो वह आमरण अनशन करने को बाध्य होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवम प्रशासन की होगी। .

up18news se chandramohan Shukla ki report

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