Friday, August 29, 2025

दहेज की मांग को लेकर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपित सास-ससुर को मिली जमानत

दहेज की मांग को लेकर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपित सास-ससुर को मिली जमानत

वाराणसी। दहेज की मांग को लेकर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चोलापुर थाने के एक मामले में आरोपी सास – ससुर की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) राजेश्वर शुक्ल की अदालत ने बसंत की बारी कुकुढ़ा, थाना चौबेपुर निवासिनी सास लालमनी यादव व ससुर बाबूलाल यादव को 75 – 75 हजार रुपये की दो जमानतें एवं व्यक्तिगत बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वरूण प्रताप सिंह ने पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी रामाधार यादव ने 28 फरवरी 2021 को चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। आरोप था कि वादी अपनी पुत्री सुमन यादव की शादी 18 जुन 2013 को संतोष यादव के साथ दान दहेज़ देकर किया था। शादी के बाद से ही वादी की लड़की को दहेज़ के लिए बार-बार उसके ससुराल वालें प्रताड़ित कर रहे थे। 26 फरवरी 2021 को वादी खोवा लेकर वाराणसी जा रहा था तो चौबेपुर में वादी का दामाद संतोष यादव मिला तथा दोबारा पैसे की मांग की और कहा कि पैसे नहीं दोगे तो हम लोग तुम्हारी लड़की को मार डालेंगे। 28 फरवरी 2021 को सुबह करीबी नौ बजे लड़की के ससुर बाबूलाल यादव, पति संतोष यादव तथा सास लालमनी देवी व उसकी देवरानी प्रीति यादव सभी लोग मिलकर मारने लगे। तब वादी की लड़की सुमन ने वादी के लड़के लालू यादव (विनोद यादव) को फोन करके बताया कि सभी लोग मिलकर उसे जान से मार देगें आकर उसे बचा लिजिए। तब वादी बाबूलाल के घर पहुंचे तो वादी की लड़की मृतक मिलीं।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वरूण प्रताप सिंह ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में अभियोजन वादी द्वारा अंतर्गत धारा 302, 498ए पंजीकृत कराया गया था। परंतु कोई साक्ष्य न पाये जानें पर धारा 302 का विलोपन करतें हुए विवेचना धारा 498ए व 306 में की जा रहीं हैं। आरोपी मृतक के सास-ससुर है जोकि अपने पुत्र व मृतक से अलग रहते थें। इस आशय का प्रमाण पत्र ग्राम प्रधान द्वारा दिया गया है जिसका कोई खण्डन अभियोजन पक्ष से नहीं किया गया है। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि प्रार्थना पत्र के अंतर्गत धारा 482 संख्या 19450 सन् 2010 आनंद सिंह व अन्य बनाया उप्र राज्य व अन्य में न्यायालय द्वारा पारित निर्णय 10 मार्च 2021 को अपने तर्कों के संबंध में संदर्भित किया गया।

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