टाउनशिप डेवलप के नाम पर प्लाट्स देनें के मामलें में रियल एस्टेट कंपनी ‘नीलगिरी’ के सीएमडी, एमडी समेत तीन की जमानत अर्जी खारिज
वाराणसी। पचास लाख रुपये से अधिक निवेश कराकर टाउनशिप डेवलप के नाम पर प्लाट्स देने के मामले में तीन आरोपितों को विशेष न्यायाधीश (तृतीय) पुष्कर उपाध्याय की अदालत से राहत नहीं मिली। मुकदमा दर्ज कराने वालों से किया गया समझौता काम नहीं आया और गुरुवार को अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी नीलगिरी ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीएमडी चेतगंज थाना क्षेत्र के सरायगोवर्धन मोहल्ला निवासी विकास सिंह, कंपनी की एमडी उनकी पत्नी रीतू सिंह और लक्सा थाना क्षेत्र के मीरबाग निवासी कर्मचारी प्रदीप यादव की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया। तीनों आरोपितों की जमानत अर्जी का विरोध एडीजीसी विनय कुमार सिंह व वादी के अधिवक्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी ने किया।
⚡अभियोजन पक्ष के अनुसार चित्रलेखा एग्रो इण्डस्टट्रीज, प्रा. लि. 693 एसपी चिरईगांव, थाना चौबेपुर निवासिनी ने मलदहिया स्थित नीलगिरी ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीएमडी विकास सिंह व एमडी रीतू सिंह और कर्मचारी प्रदीप यादव के खिलाफ चेतगंज थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि कंपनी के इन पदाधिकारियों ने टाउनशिप डेवलपमेंट के नाम पर टलाट्स देनें के लिए उससे 5047510 रुपये की किश्तों में प्लाट्स की बुकिंग के लिए एडवांस में दिये थे। इस संबंध में एक लिखा-पढ़ी भी विकास सिंह, रीतू सिंह ने करवाया, जिससे विकास सिंह व रीतू सिंह की तरफ से प्रदीप यादव ने एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर बनाये। काफी दिन बीत जाने के बाद भी हमें आरोपितों द्वारा प्लाट्स नहीं दिये गये और न ही टाउनशिप डेवलप किये। बाद में पता चला विकास सिंह उनकी पत्नि रीतू सिंह व प्रदीप यादव एक गिरोह बनाकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगो के साथ धोखाधड़ी व चिटिंग करते हुए लोगों से जमीन दिखाकर फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धन उगाही कर रहे हैं। जब मैने सीएमडी से मिलकर अपनी रकम की मांग की तो उन्हें रुपया देने से मना कर