Friday, August 29, 2025

समाजवादी पार्टी की सरकार क्यों नहीं बनी ? 2017 से पूर्व सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न क्या जनता आज तक भूल नहीं पाई ?

समाजवादी पार्टी की सरकार क्यों नहीं बनी ? 2017 से पूर्व सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न क्या जनता आज तक भूल नहीं पाई ?

अब सारा मामला साफ़ हो गया तो इस पर गम्भीरता से चुनावी विश्लेषण करने की आवश्यकता आ पड़ी है। 

रावर्ट्सगंज (सोनभद्र)

समाजवादी पार्टी ने बहुत अच्छा चुनावी प्रदर्शन किया। इससे एक बार भाजपा को पसीना तो आ ही गया था। अखिलेश यादव पूरे आत्मविश्वास के साथ जनता के बीच आए और उनको मिलने वाली सीट और वोट साफ़ दिखाई भी पड़ रहा था। व लोगों को उनमें आशा भी दिखाई दे रहा था।

लेकिन मेरे हिसाब से उत्तर प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी को कुछ इस कारणों से बहुमत से काफी दूर रखा इस पर चर्चा करने की जरूरत है।

*इमेज*- समाजवादी पार्टी की इमेज उनके लिए सबसे बड़ा रोड़ा बना। कहीं ना कहीं सपा कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी और अराजकता से जिस तरह से समाजवादी पार्टी को जोड़ा जाता है, वो उनकी सबसे बड़ी मुश्किल है। अखिलेश यादव को पूरी तरह से फ़ोकस करके इस इमेज को तोड़ना होगा। आम जनता में कहीं ना कहीं ये भय आज भी समाहित है कि समाजवादी पार्टी की सरकार में सुरक्षा और अनुशासन को ख़तरा बराबर रहेगा। इसकी झलक कई बार चुनाव अभियान में भी दिखाई पड़ा, परंतु कार्यकर्ताओं की उडंडत्ता पर सपा मुखिया द्वाराकोईअनुशासनात्मक संदेश नहीं दिया गया जो उनके लिए नुक़सानदेह साबित होता चला आ रहा है।

*महिला वोट*- उत्तर प्रदेश के मूल चरित्र की तरह ही समाजवादी पार्टी पुरुषवादी मानसिकता की पार्टी नज़र आती है। महिलाएँ इस पार्टी से अपने आपको जोड़ नहीं पातीं। इसके बिल्कुल उलट मोदी जी पर देश की महिलाओं का अभूतपूर्व विश्वास भारी पड़ा है। महिला सशक्तिकरण को मोदी जी ने बढ़ावा दिया है जिससे भाजपा को इसका बहुत बड़ा फ़ायदा भी मिलता है। अखिलेश जी को ये जगह लेने में बहुत समय लगेगा, इस जगह को लेने के लिए सभी को भरपुर प्रयास भी करना होगा।

*संगठन*- भाजपा का संगठन पूरे विश्व की राजनीतिक पार्टियों के लिए एक केस स्टडी है। जिस तरह से बूथ स्तर पर ये पार्टी अपने कार्यकर्ताओं से जुड़ती है वो कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्पशक्ति, और अद्भुत धैर्य से सम्भव है। समाजवादी पार्टी का संगठन पूरे साढ़े चार साल तक लगभग निष्क्रिय था। आप आख़िरी वक्त में पढ़ाई कर पास तो हो सकते हैं लेकिन प्रथम आना बहुत मुश्किल काम है।

*धर्म*- अब जनता धर्म के मामले में पूरे मनोयोग से ईमानदार पार्टी चाहती है। चुनाव के समय मंदिर जाना आपके लिए फ़ायदेमंद नहीं होगा। किसी को पसंद हो या न हो ये हिंदू बहुल राष्ट्र है और लोग आपके धार्मिक रुझान पर कड़ी नज़र रखते हैं। मोदी जी ने कभी भी अपने धार्मिक रुझान को छिपाने की कोशिश नहीं की है। मोदी जी हिंदू हैं तो हिंदुत्व परंपरा को उन्होंने ईमानदारी से निभाया, गंगा नहाने से केदारनाथ में ध्यान लगाने तक वो बिना किसी हिचक के खुद को भी धार्मिक दिखाते रहे हैं, जो कहीं से ग़लत नहीं है। उस समय उनका मज़ाक़ उड़ाना किसी भी पार्टी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। केजरीवाल ने भी मोदी जी से राजनीति के जो गुर के तौर तरीके सीखे हैं, उसमें खुल कर अपनी धार्मिक पहचान को स्वीकार करना भी है। तभी पंजाब चुनाव जीतने के बाद वे हनुमान जी के दर्शन करने जाते हैं और उसके बारे में बात भी करते हैं।

*मोदी*- ये वाला फ़ैक्टर समाजवादी पार्टी क्या देश की किसी भी पार्टी के समझ के बाहर है। मोदी जी और उनकी कार्यशैली का आप चाहे जितना भी विरोध करें, देश की बहुसंख्यक आबादी के लिए मोदी जी उनके घर के सदस्य हैं। वे इस स्थान तक कैसे पहुँचे इसको गम्भीरता से देखने की आवश्यकता है। उन पर टीका टिप्पणी करके उनको हराना तो अब लगभग असम्भव जैसा ही दिखाई दे रहा है।

और अंत में आशा है समाजवादी पार्टी अपनी ग़लतियों से सबक सीखते हुए पूरे पाँच साल जनता के बीच रह कर विश्वसनीय रूप से कार्य करें। एक सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाए जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विपक्ष की भूमिका बहुत ज़रूरी है। और विपक्ष की भूमिका भी रचनात्मक हो, व समय-समय पर सहयोगात्मक भी हो, यही प्रदेश को एक नयी दिशा देगा। इसी से सपा व अन्य दलों का भविष्य भी निर्धारित होगा।

आपका सभी का दिन मंगलमय हो

Up18 news report by Anand Prakash Tiwari

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