Friday, August 29, 2025

चरित्रवान व्यक्ति से ही चरित्रवान समाज बनता है। और चरित्रवान समाज से ही चरित्रवान राष्ट्र का निर्माण होता है।_महाराज अखिलानंद जी

चरित्रवान व्यक्ति से ही चरित्रवान समाज बनता है। और चरित्रवान समाज से ही चरित्रवान राष्ट्र का निर्माण होता है।_महाराज अखिलानंद जी

 

चन्दौली ब्यूरो/ डीडीयू नगर,नव दिवसीय श्री राम कथा महामहोत्सव ख्यालगढ़ (रामबाग) लौंदा चन्दौली में अष्टम दिवस की कथा में अखिलानंद जी महाराज ने श्री राम विवाह के रहस्य को बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। सद्चरित्र ही जीवन है। चरित्रवान व्यक्ति से ही चरित्रवान समाज बनता है। और चरित्रवान समाज से ही चरित्रवान राष्ट्र का निर्माण होता है। चरित्र के तीन रुप है। क्रिया, विचार और भावना। जीवन भगवान का अंश है। भगवान राम सच्चिदानंद धन है।सत् चित् और आनंद स्वरूप है।सत् के अंश में क्रिया होती है, चित् के अंश में विचार होता है और आनंद के अंश में भावना होती है। दूसरे अर्थों में सत् के अंश में कर्म, चित् के अंश में ज्ञान और आनंद के अंश में भक्ति होती है। और सीता जी भक्ति स्वरूपा हैं। कहने का आशय यह है कि चरित्रवान मनुष्य ही भक्ति को प्राप्त कर सकता है।सीता तो राम की ही। आगे कहते हैं कि जनकपुर से बारात की विदाई होने लगी तो माता सुनयना ने जानकी जी को नारी का धर्म बताती है।बारात अवधपुर आई माता कौशल्या, कैकेई और सुमित्रा जी बहुओं को गृहप्रवेश कराती है। महाराज दशरथ जी कहते “बधु लरकिनी पर घर आई,राखेहू आंख पलक की नाई।” कौशल्या माता से दशरथ जी कहते हैं कि सीता को जिस प्रकार से पलकें आंखों को रक्षा करती है वैसे ही तुम बहुओं को रखना।आगे की कथा में महराज दशरथ जी राम के राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त वशिष्ठ जी से पूछते हैं। राज्याभिषेक की तैयारी होती सारी अवधपुरी सजाई जाती है। कैकेई ने महाराज से दो वचन मांगती है एक से भरत को राजगद्दी और दूसरे वचन में राम को चौदह वर्ष का वनवास। भगवान श्री राम पिता के आज्ञा पालन करते हुए भाई लक्ष्मण और सीता जी के साथ वन गमन करते हैं। दशरथ जी राम का चिन्तन करते हुए साकेत धाम पधारते हैं।भरत जी ननिहाल से आते हैं।राम जी को मनाने चित्रकुट पहुंचते हैं। भगवान अपनी चरण पादुका देते हैं।अनेक ऋषियों से मिलते हैं। आगे भगवान पंचवटी में निवास करते हैं। मायारुपी मारीच को भगवान वध करते हैं जानकी जी का रावण हरण करता है और भगवान न जटायु को निजधाम प्रदान करते हैं कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो गये। कथा में मुख्य रूप से दीनानाथ सिंह, परमहंस सिंह, हरिवंश सिंह, आलोक पाण्डेय, संतोष पाठक, कपिल सिंह, जोगिंदर,रामहरख यादव, वासुदेव यादव जितेंद्र पाण्डेय संदीप पटेल, विजय यादव,सोनू तिवारी ,सतवन्त सिंह, जसवंत सिंह, सचिन, मिथलेश मिश्रा,दिनेश सिंह, मोहित पाण्डेय ,मरजाद यादव सहित हजारों भक्तों ने कथा श्रवण किया।

चन्दौली से संजय शर्मा की रिपोर्ट।

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