Friday, August 29, 2025

आज है मंगल की जयंती जानिए कौन थे मंगल पांडे भारत के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी

भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मंगल पांडे एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ पहली बार आवाज उठाई और आवाज इस कदर उठाई थी कि पूरे भारत में आजादी को लेकर लोगों में एक जागरूकता गई जिस तरह से मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का बिगुल फूंका था इसी का फल है कि आज भारत पूर्ण रूप से आजाद है मंगल पांडे भारत के एक ऐसे सच्चे सपूत थे जिन्होंने भारत के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कर दिया और वह अमर हो गए. सर्वप्रथम मंगल पांडे ही एक ऐसे भारतीय थे जिन्होंने अंग्रेजों के बारूद जिसमें गाय की चर्बी से बनी हुई थी उसे दांत से काटने पर मना कर दिया था और वहीं से आजादी का बिगुल पूरे भारत में बज गया .

मंगल पाण्डेयक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही थे। तत्कालीन अंग्रेजी शासन ने उन्हें बागी करार दिया जबकि आम हिंदुस्तानी उन्हें आजादी की लड़ाई के नायक के रूप में सम्मान देता है। भारत के स्वाधीनता संग्राम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में सन् 1984 में एक डाक टिकट जारी किया गया। तथा मंगल पांडे द्वारा गाय की चर्बी मिले कारतूस को मुँह से काटने से मना कर दिया था,फलस्वरूप उन्हे गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई मंगल पाण्डेय का जन्म भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा नामक गांव में एक “ब्राह्मण” परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे था ब्राह्मण होने के कारण मंगल पाण्डेय सन् 1849 में 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना मे बंगाल नेटिव इन्फेंट्री की ३४वी बटालियन मे भर्ती किये गए, जिसमें ज्यादा संख्या मे ब्राह्मणो को भर्ती की जाती थी।
जन्म  नगवा, बलिया, भारत में हुआ था,

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