Friday, August 29, 2025

रक्षा बंधन का त्यौहार स्नेह के रिश्ते को करता है मजबूत_रीना सिंह

रक्षा बंधन का त्यौहार स्नेह के रिश्ते को करता है मजबूत_रीना सिंह

_यह पर्व दुनिया में भारतीय संस्कृति को देता है अलग पहचान_

*रवीश पांडेय*

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और राष्ट्रीय जनसंघ सेवक मंच महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष आयरन लेडी रीना सिंह ने आज एक प्रेस वार्ता के दौरान संवाददाता रवीश पांडेय से एक खास बात चीत के दौरान कहा कि रक्षा बंधन का त्यौहार स्नेह के रिश्ते को मजबूत करता है और साथ ही यह पर्व दुनिया में भारतीय संस्कृति को एक अलग पहचान देता है।रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है।एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की धागे से बांध ले। रक्षा बंधन को भाई – बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा। बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है। भाई – बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है।

आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है अपितु राखी का अर्थ है, जो यह श्रद्धा व विश्वास का धागा बांधता है. वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है. उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है।

वर्तमान समाज में हम सब के सामने जो सामाजिक कुरीतियां सामने आ रही है. उन्हें दूर करने में रक्षा बंधन का पर्व सहयोगी हो सकता है। आज जब हम बुजुर्ग माता – पिता को सहारा ढूंढते हुए वृद्ध आश्रम जाते हुए देखते है, तो अपने विकास और उन्नति पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ पाते है। इस समस्या का समाधन राखी पर माता-पिता को राखी बांधना, पुत्र-पुत्री के द्वारा माता पिता की जीवन भर हर प्रकार के दायित्वों की जिम्मेदारी लेना हो सकता है। इस प्रकार समाज की इस मुख्य समस्या का सामाधान किया जा सकता है।

इस प्रकार रक्षा बंधन को केवल भाई बहन का पर्व न मानते हुए हम सभी को अपने विचारों के दायरे को विस्तृ्त करते हुए, विभिन्न संदर्भों में इसका महत्व समझना होगा.।रक्षाबंधन अपनत्व और प्यार के रिश्तों को मजबूत करने का पर्व है।बंधन का यह तरीका ही भारतीय संस्कृ्ति को दुनिया की अन्य संस्कृतियों से अलग पहचान देता है।

ऎसा नहीं है कि केवल भाई -बहन के रिश्तों को ही मजबूती या राखी की आवश्यकता होती है। जबकि बहन का बहन को और भाई का भाई को राखी बांधना एक दुसरे के करीब लाता है।उनके मध्य के मत _भेद मिटाता है।आधुनिक युग में समय की कमी ने रिश्तों में एक अलग तरह की दूरी बना दी है।जिसमें एक दूसरे के लिये समय नहीं होता, इसके कारण परिवार के सदस्य भी आपस में बातचीत नहीं कर पाते है।संप्रेषण की कमी, मतभेदों को जन्म देती है. और गलतफहमियों को स्थान मिलता है।

अगर इस दिन बहन -बहन, भाई-भाई को राखी बांधता है तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटा जा सकता है।यह पर्व सांप्रदायिकता और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता है।जरुरत है तो केवल एक कोशिश की।

आज जब हम रक्षा बंधन पर्व को एक नये रुप में मनाने की बात करते है, तो हमें समाज, परिवार और देश से भी परे आज जिसे बचाने की जरुरत है, वह सृ्ष्टि है। राखी के इस पावन पर्व पर हम सब को एक जुट होकर यह संकल्प लें कि राखी के दिन एक स्नेह की डोर एक वृक्ष को बांधे और उस वृ्क्ष की रक्षा का जिम्मेदारी अपने पर लें।वृक्षों को देवता मानकर पूजन करने मे मानव जाति का स्वार्थ निहित होता है।जो प्रकृति आदिकाल से हमें निस्वार्थ भाव से केवल देती ही आ रही है, उसकी रक्षा के लिये भी हमें इस दिन कुछ करना चाहिए।

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