Friday, August 29, 2025

पति पत्नी के साथ कुंड में स्नान करने से होती है संतान की प्राप्ति

वाराणसी : लोलारक कुंड उत्तर प्रदेश की  सबसे प्राचीन नगरी काशी यानी की  बनारस में है ऐसा  मान्यता है कि यहां पर हिंदू महीने के हिसाब से भादो महीने ख़सष्टमी के दिन में जो पति पत्नी को  संतान  नही होते हैं, वो दम्पत्ति साथ में कुंड में स्नान करते है तो  संतान की प्राप्ति होती है  हर साल यहां पर लाखों लोगों की भीड़ लगी होती है.

आइए जानते है क्या है यहां की मान्यता :

लोलार्क कुण्ड उत्तर प्रदेश के प्राचीन नगर बनारस में तुलसीघाट के निकट स्थित एक कुण्ड है। मान्यता अनुसार यह अति प्राचीन है तथा इस कुण्ड का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। कालान्तर में इन्दौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर ने इस कुण्‍ड के चारों तरफ कीमती पत्‍थर से सजावट करवाई थी। इसी के समीप लोलाकेश्‍वर का मंदिर है। भादो महीने अगस्‍त-सितम्‍बर में यहां लक्खा मेला लगता है और तब काशी के इस लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। अस्सी के भैदानी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर हर साल लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगता है। लक्खा मेले में लोलार्क पष्ठी या सूर्य षष्ठी स्नान की बड़ी मान्याता है, और कहते हैं कि महादेव लोलार्केश्वर संतान प्राप्ति की कामना वाले दंपतियों की मनोकामना पूरी कर देते हैं। लोलार्क कुंड में स्नान करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की यहां भीड़ जुटती है।

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