Friday, August 29, 2025

डॉ जीपी निराला का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है।

डॉ जीपी निराला का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है।

सोनभद्र,
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से आकाशवाणी केंद्र ओबरा के पूर्व निदेशक डॉ जीपी निराला को श्रद्धांजलि दी गई।
शहीदों की धरती से ताल्लुक रखने वाले गाजीपुर जनपद के ब्लॉक जखनिया के राजापुर गांव के गरीब परिवार में जन्मे आकाशवाणी केंद्र ओबरा सोनभद्र के पूर्व निदेशक डॉ जीपी निराला ने अपने कठिन परिश्रम, मेहनत, सीधे-सादे व्यक्तित्व के बल पर साहित्य के क्षेत्र में आकाशवाणी केंद्र ओबरा, वाराणसी में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहते हुए साहित्य की बुलंदियों को छुआ। इनका आकस्मिक निधन साहित्य, कला, संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति है इसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार डॉ जीपी निराला कोरोना संक्रमित थे और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में गत 2 सप्ताह से वेंटिलेटर पर थे, 9 मई 2021 को दोपहर 12:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस लिया और इनका अंतिम संस्कार मणिकांता घाट पर हुआ मुखाग्नि इनके छोटे पुत्र बृजेश कुमार ने दिया।


आकाशवाणी केंद्र से अधिक से अधिक कलाकारों, साहित्यकारों को जोड़कर आकाशवाणी केंद्र द्वारा प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को समृद्ध शाली बनाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
डॉ निराला ने अपने कार्यकाल में *”लोककला विशेष संदर्भ सोनभद्र का आदिवासी” जीवन* विषय पर सोनभद्र के आदिवासी अंचलों में निवास करने वाले आदिवासियों के साहित्य, कला, संस्कृति पर शोध कार्य काशी विद्यापीठ वाराणसी से किया था और उनके शोध कार्य में केबी स्नातकोत्तर महाविद्यालय मिर्जापुर के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर मूल शंकर शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शोधकार्य के सिलसिले में मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर, लोकवार्ता शोध संस्थान के सचिव डॉ अर्जुन दास केसरी, असुविधा पत्रिका के प्रधान संपादक रामनाथ शिवेंद्र, आकाशवाणी केंद्र ओबरा के कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर सुशील राय, लाइब्रेरियन एसपी निराला, वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नीरव, समाजसेवी राम प्यारे सिंह, विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, पूर्वांचल प्रेस क्लब सोनभद्र के पूर्व अध्यक्ष राम प्रसाद यादव, आदिवासी लोककला केंद्र के अध्यक्ष/ रंगकर्मी हरिशंकर शुक्ला, आई एफ डब्ल्यू जे के जिलाध्यक्ष विजय विनीत, सहयोगी सुनील तिवारी सहित जनपद के साहित्यकार, पत्रकार एवं संस्कृति कर्मी आदिवासीजन इनके शोध कार्य में सहायक रहे। आकाशवाणी केंद्र ओबरा के कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने के लिए जंगल की खाक छानने वाले, आदिवासियों के लोकरंग में रंग कर गूढ़ जानकारी प्राप्त करने वाले, आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहने वाले डॉक्टर जी पी निराला को 2006 में जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में पूर्वांचल प्रेस क्लब सोनभद्र द्वारा पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कैमूर भूषण सम्मान, गीता जयंती समारोह समिति, मित्र मंच, विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट, सोनघाटी, गांव गिराव, पत्रिका सहित जनपद के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओ द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया।
परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ के स्वामी अड़गड़ानंद के अनन्य शिष्यों में एक डॉक्टर जीपी निराला अध्यात्म से भी जुड़े रहे और समाजसेवी होम्योपैथ चिकित्सक डॉक्टर कुसुमाकर श्रीवास्तव के संयोजन में गीता जयंती के अवसर पर गीता जयंती समारोह समिति द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रम में कई स्मरणीय व्याख्यान भी दिया।
आकाशवाणी केंद्र ओबरा सोनभद्र से अधिक से अधिक कलाकारों, साहित्यकारों को जोड़कर आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को लोकप्रिय बनाया।
विंध्य संस्कृति समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा आयोजित वर्चुअल शोक सभा में कलमकार संघ के जिला अध्यक्ष राम प्रसाद यादव, उपजा के जिला अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष बृजेश शुक्ला सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारियों सदस्यों सहित पत्रकार डॉ परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव,आशुतोष पांडे, जितेंद्र गुप्ता, कौशलेंद्र पांडे, सचिन गुप्ता, ज्ञानदास कनौजिया, राम नरेश शुक्ला, सिराज अहमद, चंद्रकांत, हर्षवर्धन केसरवानी, साहित्यकार प्रतिभा देवी, तृप्ति केसरवानी सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों सहित अन्य साहित्यकारों, पत्रकारों, रंग कर्मियों ने शोक संवेदना व्यक्त किया।

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