वाराणसी : कहते हैं कि काशी सबसे प्राचीन देवनगरी है और भगवान शिव यहीं पर वास किए थे और आज भी वास करते हैं भगवान शिव की कृपा दृष्टि से प्रख्यात काशी आज वाराणसी के नाम से जाना जाता है पुराणों में लिखा है कि यहां पर ईश्वर शिव शंभू खुद घाटों पर विराजमान रहते थे और यहां के बारे में मां पार्वती को बताते थे काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव का मंदिर जोकि 9 डिग्री झुका हुआ है लेकिन विश्व में कहीं भी इसका नाम नहीं है जबकि पीसा की मीनार केवल 5 डिग्री झुकी हुई है और उसे विश्व विरासत की उपाधि मिली है आइए जानते हैं कि वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव की मंदिर की विशेषताएं.
पीसा की मीनार केवल 5 डिग्री झुकी हुई है,और वह विश्व विरासत होगई जबकि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास यह #रत्नेश्वर मंदिर 9 ° डिग्री जुका हुआ है,लेकिन
एक पर्यटक स्थल के रूप में भी इसका उल्लेख नहीं है।
पीसा की मीनार 54 मीटर ऊंची है,जबकि यह मंदिर 74 मीटर ऊँचा है।
आइए हम इस मंदिर को पूरी
दुनिया में विश्व विख्यात करते हैं क्यो की पिसा की मीनार इसके आगे कुछ नही है,अपनी विरासतों को दुनिया के झूठ के ऊपर सत्य सनातन के रूप में रखिये। दुनिया मे कोई नही सनातन जेसा वैज्ञानिक और प्रमाणिक।पिसा की मीनार से बड़ी दुनिया की विरासत ये मन्दिर है ये दुनिया को दिखाइये.