Friday, August 29, 2025

बनारस में अवैध नस्ल की मछलियां पकड़ी गई

पश्चिम बंगाल से हरियाणा और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली के बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री का सिलसिला जारी है। बुधवार को लंका थाने की पुलिस ने डाफी टोल प्लाजा के पास ट्रक से 11 टन प्रतिबंधित मछली के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गये लोग पश्चिम बंगाल और आसपास के बताए जा रहे हैं। इंस्पेक्टर लंका बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई। पकड़े गये लोगों से पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले 26 नवम्बर को लंका पुलिस ने डाफी टोल प्लाजा के पास से 36 मीट्रिक टन मांगुर मछली का बीज पकड़ा था। इससे पहले 15 मार्च को पश्चिम बंगाल से हरियाणा ले जायी जा रही 35 टन मांगुर मछली पकड़ी गई थी। इससे भी पहले भदोही और चंदौली पुलिस ने प्रतिबंधित मांगुरू मछली को बरामद किया था। प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली का वैज्ञानिक नाम क्लेरियस गेरीपाइंस है। यह मांस खाने वाली मछली होती है। मछली पालक अधिक मुनाफे के चक्कर में सरकारी व निजी तालाबों और खेतों में पाल रहे हैं। यह मछली चार माह में ढाई से तीन किलो तक तैयार हो जाती है। इसकी कीमत बाजारों 80 से 100 रुपये किलो है।

थाईलैंड की प्रजाति होने के कारण इसे थाई मांगुर कहा जाता है। डॉक्टर मानते हैं कि मांगुर मछली खाने से कैंसर हो सकता है। मछली पर बैन होने के बावजूद यह खुलेआम बाजार में बेची जा रही है। दुकानदार हाइब्रिड मांगुर को देसी मांगुर या बॉयलर मांगुर बता कर बाजार में बेचते हैं।

escort bayan sakarya escort bayan eskişehir