पर्यावरण बचना सबका अधिकार- डॉ भूपेंद्र कुमार 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के इस अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित इस वर्ष की थीम है “ईकोसिस्टम रेस्टॉरेशन ”। यह दिवस पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को समझने, और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। हाल के अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बीते सौ वर्षों में पृथ्वी के तापमान में 1° सेल्सियस की वृद्धि हुयी है, और हर दस वर्ष उपरांत पृथ्वी के तापमान में 0.2° सेल्सियस की वृद्धि देखने को मिल रही है। अनियंत्रित प्रदूषण और अत्यधिक वनों के कटाव ही तापमान वृद्धि, और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारक हैं। वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव गर्म क्षेत्रों की अपेक्षा ध्रुवीय और द्वीपीय क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलते हैं। छोटे जीव, खासकर कीट, बढ़ते तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इनमें ग्लोबल वार्मिंग का असर स्पष्ट देखने को मिलता है। मैक्सिकन कीट पर मेरे हाल के अध्ययनों और शोधों से यह स्पष्ट हुआ है कि यदि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि होती रही तो निकट भविष्य में इन कीटों का आकार छोटा होता जायेगा। उनकी भोज्य और प्रजनन क्षमताऐं घटेंगी, और लिंगानुपात के दृष्टिकोण से उनके समूहों में नर कीटों की प्रचुरता देखने को मिलेगी। निकट भविष्य में ये बदलाव इस कीट प्रजाति की विलुप्तता के कारक भी बन सकते हैं। संभवतः अन्य जीव प्रजातियाँ भी वैश्विक जलवायु परिवर्तन अथवा ग्लोबल वार्मिंग को कुछ इसी प्रकार सहन कर रही हों, अतः यह हम सभी के लिये गहन शोध का विषय है। जलवायु में निरंतर हो रहे बदलावों को समय रहते ना रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब अन्य जीवों की भांति हम भी अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष करते प्रतीत होंगे।