देवाधिदेव महादेव एवं जगदंबा माता पार्वती की कथा सुनने हेतु श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
घोरावल सोनभद्र
केवटा गांव में आयोजित रुद्र महायज्ञ एवं शिवमहापुराण ज्ञानयज्ञ में आठवें दिन रविवार को देवाधिदेव महादेव एवं जगदंबा माता पार्वती की पावन कथा एवं प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।वहीं भक्तगणों ने यज्ञ मंडप की पूजा व परिक्रमा की।व्यासपीठ से शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने गुरू की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि हमारी सनातन परंपरा में गुरु को साक्षात ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का स्वरूप माना गया है।गुरू ही हमारा सच्चा मार्गदर्शक है।व्यक्ति के इहलौकिक एवं पारलौकिक जीवन में कल्याण के लिए गुरु परंपरा आवश्यक है।बिना गुरुकृपा के हमारा कल्याण संभव नहीं है।भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा पूजन काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।इस परंपरा में शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं, जिनसे वह विद्या और शिक्षा लेते हैं।हमारी संस्कृति में गुरू-शिष्य परंपरा आध्यात्मिक प्रज्ञा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का सोपान है।भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरु (शिक्षक) अपने शिष्य को शिक्षा देता है या कोई विद्या सिखाता है। बाद में वही शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम चलता जाता है। यह परंपरा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है। गुरु-शिष्य की यह परम्परा ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में हो सकती है, जैसे- अध्यात्म, संगीत, कला, वेदाध्ययन, वास्तु आदि।
आयोजक मंडल के विनोद तिवारी ने बताया कि 20 फरवरी को सुबह 10 बजे पूर्णाहुति संपन्न होगा एवं इसके बाद विशाल भण्डारे के साथ कथा का विश्राम होगा।
Up18news se Ram Anuj Dhar Dwivedi ki report