यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता: अर्थात जहां नारी की पूजा की जाती है, उसका सम्मान किया जाता है वहां देवताओं का वास होता है
द ट्रु मिरर
रत्ना तिवारी
लखनऊ
भारत में प्राचीन काल से ही महिला और पुरुष को समान रूप से देखा जाता रहा है उनको एक दूसरे का पूरक माना जाता रहा है। बीच के कालखंड में आक्रमणों की वजह से महिलाओं की भूमिका कुछ हद तक सीमित हुई, किंतु पुनः समाज में जागृति आई और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपना अद्भुत योगदान दिया।
भारतीय संस्कृति में नारी का विशेष स्थान सदियों से रहा है यदि आज के परिपेक्ष में मैं कहूं तो महिलाएं दो भागों में बटी हैं, एक तरफ तो जहां कुछ शिक्षित
महिलाएं प्रगति के हर क्षेत्र में आसमान छू रही हैं वहीं कुछ महिलाएं अशिक्षित होने की वजह से दबी हुई और पीछे रह गई हैं।
ऐसे में मैं सभी शिक्षित महिलाओं से अनुरोध करेंगे कि वह ग्रामीण क्षेत्र के जिन महिलाओं के किसी भी रूप में सहायता कर सकने के लिए आगे आए क्योंकि महिला होने के नाते उनकी समस्याओं को वह अच्छी तरह समझ सकती हैं, निः संदेह पुरुष समाज को भी महिलाओं के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन तो करना ही होगा।
ईश्वर ने हमें जो गुण दिए हैं, उसे हमें निखारना है। स्वयं पर विश्वास करें और किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं रखें।
विकास की राह पर बढ़ते हुए विश्व में अपनी भूमिका निभाने के लिए अग्रसर है वहां महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अपने हर कार्य को अपनी क्षमता के अनुसार प्रसन्नता से करें क्योंकि यदि घर की महिला सचमुच प्रसन्न और सुदृढ़ है तो हमारा परिवार,समाज और राष्ट्र भी प्रसन्न और सुदृढ़ बनेगा।
भारत में नारी ज्ञानमयी, शौर्यमयी होने के साथ ही साथ शक्ति का रूप भी है। वह धन देने वाली मां लक्ष्मी का रूप है तो जहां ज्ञान की बात करें तो सरस्वती और वह रण के क्षेत्र में दुर्गा भी
है ।
डॉ• पूजा सिंह
उपाध्यक्ष
भागीरथी एनक्लेव
Up 18 news से काली शंकर उपाध्याय की एक रिपोर्ट
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