Friday, August 29, 2025

महामूर्ख हंसो हंसाओ रेला में मानव समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नव संवत्सर-2080 अभिनंदन सम्मान भेंट कर

महामूर्ख हंसो हंसाओ रेला में मानव समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नव संवत्सर-2080 अभिनंदन सम्मान भेंट कर प्रोत्साहित किया गया

 

वाराणसी महानगर के पहाड़ियां स्थित नक्खीघाट, तपोवन आश्रम के निकट महामूर्ख हंसो हंसाओ रेला एवं नव संवत्सर -2080अभिनंदन सम्मान- प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा,सर्वदलीय गौ रक्षा मंच, भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा ब्यूरो, भारतीय विधिक वार सहायता एसोसिएशन एवं अस्मिता नाट्य संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश, डॉ सुबाष चंद्र के स्वागत संरक्षण में हास्य धुरंधर डॉ.अजीत श्रीवास्तव चपाचप बनारसी के अध्यक्षता में, कवि इंद्रजीत निर्भीक के प्रमुख संयोजन/संचालन में सर्वप्रथम केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा ऊपर से नीचे तक,दायें से बातें तक जो भी अशोभनीय कचड़े हैं,उसकी सफाई के सराहनीय पहल का समर्थन करते हुए। झाड़ू लगाकर महामूर्खो ने शुभ उदघाटन किया। जिनमें हरपाल दास नागवानी, अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, हिमांशु सिंह,पवन कुमार सिंह एडवोकेट, भुलक्कड़ बनारसी एवं रोटी बैंक की अध्यक्ष पूनम सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

तत्पश्चात एक चतुर नारि करिके श्रृंगार हास्यास्पद गाने पर संदीप मौर्य कत्थक कलाकार के नृत्य के दौरान गदही दुल्हा कवयित्री पूनम श्रीवास्तव अनूठे अंदाज में मीरजापुर से पहुंची।दूसरी तरफ युवा कवयित्री प्रज्ञा श्रीवास्तव भी उल्लू दुल्हन के रूप में वाराणसी से बेहतरीन झूमर नृत्य करते हुए पहुंची।

समलैंगिक वैवाहिक संवाद गदही दुल्हा पूनम श्रीवास्तव ने –

पूर्व जन्म में मैं मानव थी अब गदही कुल में आई हूं जबसे गदही कुल में आई हूं बहुत आत्म सुख पाई हूं, लोग दूध मलाई खाकर खादी पहन के भी गांधी जी का अपमान करते हैं, हम सब तो घास भूसा खाकर ,लादी ढोकर भी अपने कुल का सम्मान करते हैं। इतना सुनते ही समलैंगिक बेमेल विवाह को करने पर उतारू गदही दूल्हा ने ताली बजाकर अपने समर्थकों सहित अगले वर्ष तक के लिए वैवाहिक प्रक्रिया स्थगित करने की महामूर्खता का एलान कर दिया गया उल्लू दुल्हन प्रज्ञा श्रीवास्तव ने कहा कि – उल्लू नहीं करता,कभी उल्लूपने की बात, उल्लूपने की बात करता है आदमी की जात, इसलिए उल्लू दिन में नहीं देखता, देखता है सिर्फ रात सुनाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया।

इतना सुनते ही समलैंगिक बेमेल विवाह को करने पर ताली,थाली बजाकर अपने समर्थकों सहित अगले वर्ष तक के लिए वैवाहिक प्रक्रिया स्थगित करने का ऐलान कर दिया।

हास्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती वंदना से संगीता श्रीवास्तव ने किया।

स्वागत गान इंद्रजीत निर्भीक ने – स्वागतम् – स्वागतम्, स्वागतम् हम सुनाये कि हम कितना खुश हैं,ये कैसे बताए, विशेष लोटपोट डा.अजीत श्रीवास्तव चपाचप बनारसी ने -लाल टमाटर देहरादून,काट राजा दूननू जून और दुहाई-है, दुहाई है, गंगा के नाम पर, अरबों की रकम आई है, गंगा के नाम पर, फिर भी कितनी बेहयाई है गंगा के नाम पर सुनाकर गुदगुदाया। सुख मंगल सिंह मंगल ने -ना मांग किसी और से उषा की रश्मियां, खुद से ही अपने आप में, खुद प्रकाश कर, सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध ने-नव नगद नगद ना तेरह उधार चाहिए, संतोष कुमार प्रीत ने-हसो-हसाओ आज है,नव संवत्सर 2080 का अभिनंदन का खेला, झरना मुखर्जी ने -टुकड़ों बिखरना नहीं, जुड़ना है ज़िन्दगी, पुरुषार्थ से तक़दीर बदलना है ज़िन्दगी, डॉ.सुबाष चंद्र ने – फूलों सा खिलखिलाते रहना, गैरों को भी अपना बनाते रहना सुनाकर वाहवाही लूटा। विशेष रूप से कमलेश विष्णु जिज्ञासु, महेन्द्र अलंकार, गौरांग मिश्रा,चिंतित बनारसी,डॉ. पुष्पेंद्र अस्थाना पुष्प, शायर जमाल बनारसी, काकू सिंह,कृष्णानंद दुबे गोपाल, दिलीप चौहान बागी, यशवंत यादव, पूर्व पार्षद विकास चंद तिवारी

सुषमा जौनपुरी, भुलक्कड़ बनारसी , सिद्ध नाथ शर्मा , फायर बनारसी , पूनम श्रीवास्तव , प्रज्ञा श्रीवास्तव , ,बुल-बुल लहरी, कृष्णानंद बैरागी, सुरेश अकेला सहित अनेकों रचनाकारों ने हास्य रस छेड़ा।

आयोजन के अंत में नव संवत्सर अभिनन्दन सम्मान मुख्य अतिथि प्रख्यात शिक्षाविद् राकेश चंद्र पाठक महाकाल ने नव संवत्सर अभिनन्दन सम्मान मंचीय एवं आनलाईन 108 लोगों को भेंट किया

स्वागत संबोधन -भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा ब्यूरो के राष्ट्रीय महासचिव भगवती प्रसाद गौड़, नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता ने और वाराणसी जिला अध्यक्ष श्रवण कुमार नागवानी एवं धन्यवाद आभार स्वागत संरक्षक श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश एवं डॉ.सुबाष चंद्र ने किया।

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