#राममंदिर पर एक बहुत ही अद्भुत जानकारी..
●मंदिर के लिए संघर्ष से जुड़े,सारे ऐतिहासिक तथ्यों को एक टाइम कैप्सूल में,
पृथ्वी के 2000 फीट भीतर गाड़ा गया है ,
ताकि सारी जानकारियां सुरक्षित रखे रहें।
●टाइम कैप्सूल एक बॉक्स होता है जिसमें,
वर्तमान समय की जानकारियां भरी होती हैं,
देश का नाम,जनसँख्या,धर्म,परंपराएं और,
वैज्ञानिक अविष्कार की जानकारी इस बॉक्स में,
डाल दी जाती हैं।
●कैप्सूल में कई वस्तुएं,रिकार्डिंग इत्यादि भी डाली जाती हैं,इसके बाद कैप्सूल को,कांक्रीट के आवरण में पैक कर,जमीन में बहुत गहराई में गाड़ दिया जाता है ताकि,
●सैकड़ों-हजारों वर्षों बाद जब किसी और सभ्यता को,ये कैप्सूल मिले तो वो ये जान सकें
कि उस प्राचीन काल में मनुष्य कैसे रहता था!
कैसी भाषाएं बोलता था।
●टाइम कैप्सूल की अवधारणा मानव की आदिम इच्छा का ही प्रतिबिंब है।
●पाषाण युग से ही मानव की सोच रही है कि,
वह भले ही मिट जाए लेकिन उसके कार्यों को,
आने वाली पीढ़ियां याद रखें।
●इसी सोच नें मानव को इतिहास लेखन हेतु
प्रेरित किया होगा।
किसी प्राचीन गुफा की खोज होती है तो उसकी,
दीवारों पर हज़ारों वर्ष पुराने शैलचित्र पाए जाते हैं।
●ये भी एक तरह के टाइम कैप्सूल ही हैं जो,
एक खास तरह की स्याही से दीवारों पर उकेरे गए होते हैं!
●उनकी स्याही में इतना दम कि,हजारों वर्ष पश्चात् की पीढ़ियों को,अपनी कहानी पढ़वा सके..
●भारत के प्राचीन मंदिरों में स्थापित शिलालेखों का उद्देश्य यही था,जो आधुनिक काल में टाइम
कैप्सूल बनाने वालों का है!
●भविष्य की पीढ़ियों को वर्तमान के बारे में,
बताने की ललक ने टाइम कैप्सूल की अवधारणा को जन्म दिया!!
●इस राम मंदिर निर्माण कार्य के बाद करिब हजार साल तक-मरम्मत की जरूरत नहीं..
#जयसियाराम #सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ 🚩 🧡