21 सितंबर को मनाया जाएगा अघोर-परंपरा का सबसे बड़ा पर्व ‘लोलार्क छठ’
दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर अध्यात्म की सर्वोत्तम अवस्था, अघोर-परम्परा, में यूँ तो कई धार्मिक पर्व संपन्न होते हैं, लेकिन ‘लोलार्क छठ’ का उत्साह अलग ही नज़ारा लिए हुए होता है । दुनिया भर के अघोर साधकों, साधुओं, महात्माओं और श्रद्धालुजनों के बीच इस पर्व की ख़ासी अहमियत है । इस दिन वाराणसी की रविन्द्रपुरी कॉलोनी स्थित अघोर-परंपरा की विश्वविख़्यात अघोरपीठ, ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’, में दुनिया के कोने-कोने से अघोर-भक्तों का जमावड़ा लगता है । यह पर्व वर्तमान अघोर परंपरा के आराध्य-प्रणेता-ईष्ट, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी, की छठी के तौर पर मनाया जाता है । इस दिन लोग ‘क्रीं-कुण्ड’ परिसर में बाबा कीनाराम जी, अघोरेश्वर महाप्रभु व् तमाम औघड़-संत महात्माओं की समाधि का दर्शन-पूजन करते हैं । साथ ही यहाँ के वर्तमान पीठाधीश्वर, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी, की एक झलक पाने के लिए लाखों लोग सुबह से ही लाइनबद्ध होकर अपने बारी का इंतज़ार करते हैं । ग़ौरतलब है कि शोधकर्ताओं और मान्यताओं के मुताबिक़ बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी कोई और नहीं बल्कि स्वयं बाबा कीनाराम जी के पुनरगामित स्वरुप हैं ।
‘लोलार्क छठ’, जिसे ‘लोलार्क षष्ठी’ भी कहा जाता है, के अवसर पर धार्मिक-अध्यात्मिक क्रियान्यवयन के साथ अघोरपीठ में कई तरह के समाजिक कार्य भी होते हैं । 21 सितम्बर 2023 को मनाये जाने वाले ‘लोलार्क छठ’ पर इस बार भी सामाजिक संस्थान ‘अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान’ वाराणसी के तत्त्वाधान में कई समाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन रखा गया है । इसके अलावा हमेशा की तरह संस्थान की ‘महिला मण्डल’ शाखा ने समाजिक सरोकार के कई कार्यक्रमों की अगुवाई करने का फैसला किया है, जिसमें ‘सामूहिक रक्तदान’ का कार्यक्रम सबसे अहम् है । उधर ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ पर 2-3 दिन लाखों भक्तों की भीड़ और कई वी.आई.पी. के संभावित आगमन के मद्देनज़र प्रशासन ने क़मर कस ली है । वरिष्ठ और क्षेत्रीय अधिकारी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख़्ता इंतज़ाम में लगे हुए हैं ।
काली शंकर उपाध्याय की एक रिपोर्ट