शोध,ज्ञान की खोज का मुख्य आधार
वाराणसी
आज दिनांक 5 नवंबर 2023 दिन रविवार को आर्य महिला पीoजीo कॉलेज वाराणसी के समाजशास्त्र विभाग द्वारा “फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम”के तहत सात दिवसीय रिसर्च मेथोडोलॉजी वर्कशॉप का अंतिम दिवस संपन्न हुआ। संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण विधियों के साथ तैयार करने का प्रयास करता है। वे प्रभावी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं। छात्र बेहतर सीखते हैं और इसलिए परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह विश्वविद्यालयों को शीर्ष क्रम के विश्वविद्यालय बनने में मदद करता है। शोध, ज्ञान की खोज और उसके विस्तार की प्रक्रिया को मार्गदर्शित करने का मुख्य आधार है।शोध पद्धति एक अध्ययन के लिए जानकारी खोजने और विश्लेषण करने के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीकों को संदर्भित करती है,संकाय विकास समापन सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर डा oराजा पाठक ( असिस्टेंट प्रोफेसर आई यू सी टी यू, बीएचयू) का सारगर्भित संबोधन प्राप्त हुआ।प्रोफेसर पाठक ने “डिकोडिंग सिस्टम ऑफ संस्कृत शास्त्र” के विषय पर बोलते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा का उद्गम वेदो और वेदांगो में निहित है। आज के सभी विज्ञानों का मूल तत्व ज्योतिष में निहित है आवश्यकता हैं तो वैदिक श्लोकों को समझने का और उसे अपने जीवन काल में अमल करने का प्रयास करे देश में लगातार हुए बाह्य आक्रमणों ने हमारी ज्ञान परंपरा को क्षति पहुंचाई। इस वक्तव्य में वैदिक श्लोकों को डिकोड करने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला। समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डा आभा सक्सेना (पूर्व प्राचार्या ,अग्रसेन पी.जी.कॉलेज) और डा प्रियंका सिंह(एसोशिएटप्रोफेसर समाजशास्त्र , जे एन सी यू) उपस्थित रहीं। आज कार्यशाला में डा ओमप्रकाश मिश्रा, श्रीकांत ,अथर्व,डा0 शुभ्रा सहित 60 प्रतिभागी उपस्थित रहे। संकाय विकास प्रतिभागियों को महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना दुबे ने प्रमाणपत्र वितरित किया।
आज के कार्यक्रम का संचालन व अतिथियों का स्वागत डा0 स्वाती मिश्रा व डा0 वीथिका दास ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा0अरविंद दुबे ने किया।आज के कार्यक्रम में विभाग के प्रोफेसर डा0कंचन,डा0 दीपमाला जायसवाल,डा0मिथिलेश मिश्रा,डा0 संतोष और डा0 वीथिका दास व डा0 विकास की सहभागिता रही।
जय प्रकाश की एक रिपोर्ट