कर्मण्यवधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” के सिद्धांत पर समाजसेवा होनी चाहिए… डॉ. अजीत कुमार पाण्डेय
वाराणसी रामकटोरा स्थित काशी सेवा समिति महामना मालवीय सभागार, में मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजर्षी जयपाल नयाल सनातनी के कर कमलों द्वारा शुभारंभ और मुख्य अतिथि – डॉ.संभाराव राजाराम बाविस्कर -कुलपति – विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर के कर कमलों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को हिन्दी साहित्य शिरोमणि एवं विद्या वाचस्पति विशेष मानद सम्मान समारोह का आयोजन प्रयागराज के पूर्व जिला जज एवं अंतर्राष्ट्रीय गज़लकार डॉ. चंद्रभाल सुकुमार के अध्यक्षता में स्वागताध्यक्ष प्रकाश कुमार श्रीवास्तव, स्वागत संरक्षक सूर्य कुमार सिंह एवं स्वागत संयोजक डॉ. सुबाष चंद्र के स्वागत संयोजन में संपन्न हुआ
पिछले दो दशकों से समाजसेवा में कार्यरत और गरीब मलिन बस्तियों के साथ ही जरूरतमंद युवाओं के विकास के लिए शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करनेवाली सामाजिक संस्था दिशा सोसाइटी के प्रमुख अजीत कुमार पाण्डेय “बाबुल” को विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर की ओर से विद्या वाचस्पति (डॉक्टरेट )की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
उक्त अवसर पर समाजसेवी अजीत पाण्डेय ने इस सम्मान को अपने माता पिता को समर्पित किया व संस्थान के सभी वरिष्ठजनों का आभार व्यक्त किया
पत्रकारों से वार्ता में बताया कि ” आज से 2 दशक पहले अकेले ही समाज सेवा के उद्देश्य से “दिशा सोसाइटी “नामक सामाजिक व आध्यात्मिक संस्था की नींव रखी थी, जो की आज समाजसेवियों का वटवृक्ष बन गया है ,आज दिशा सोसाइटी “किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय जात पात से ऊपर उठकर समाजसेवा करने वाली संस्था है दिशा सोसाइटी द्वारा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की लिए भव्य सांस्कृतिक समारोह तथा लोगो को अध्यात्म से जोड़ने के लिए भागवत कथा, शिव पुराण तथा कृष्ण लीलाओं का आयोजन किया जाता है , जिससे कि समाज के लोग मानसिक रूप से स्वस्थ हो कर उत्तम सोच के साथ जनमानस के सुख दुःख में भागीदारी कर सके
हमेशा गीता के सिद्धांत “कर्मण्यवधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” के सिद्धांत पर समाज सेवा को प्राथमिकता दी जाती है, और समाज के अंतिम जरूरतमंद तक हमारी सेवाएं पहुंचे इस प्रतिबद्धता के लिए हम संकल्पित हैं