पीएम का संसदीय क्षेत्र बना क्योटो से टोटो: काली शंकर उपाध्याय के कलम से
वाराणसी : धर्म की नगरी आध्यात्मिक नगरी और सबसे पुराना शहर वाराणसी काशी या बनारस कहे जाने वाले शहर का इस समय हाल एकदम बेहाल हो चुका है एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार यहां से संसदीय का चुनाव लड़े और दोनों बार प्रधानमंत्री बने हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी को बहुत सारे प्रोजेक्ट दिए और बहुत सारा विकास भी किए हैं,लेकिन काशीवासी आजकल एक ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं ,जो कि अब आम जनमानत से भी नहीं छूपी है, किसी गली मोहल्ले या शहर के लंका दुर्गाकुंड भेलूपुर रविंद्रपुरी, अस्सी, सिगरा, रथयात्रा ,फातमान रोड, कैंट पांडेपुर लहरतारा शहर के चारों तरफ इस समय टोटो का जाल बिछा हुआ है, जहां से भी गुजारिए सिर्फ टोटो, टोटो, टोटो, सिर्फ टोटो ही दिखाई देते हैं, गली से लेकर सड़कों तक टोटो का इस कदर जाल फैला हुआ है ,की आम जनमानस का सड़क पर चलना दुबर हो गया है कितने लोग तो शहर में आने से भी कतराते हैं ,कि कहीं जाम के शिकार ना हो जाए, अब बनारस मतलब टोटो सिटी या जाम का दूसरा नाम टोटो बनारस की आता है , यातायात व्यवस्था एकदम तार तार हो चुकी है ,लेकिन किसी को कोई सुध नहीं है, आए दिन एजेंसियों से टोटो निकलते जा रहे हैं, और सड़क जाम होते जा रहे हैं, एक बार प्रधानमंत्री जी वाराणसी ने अपने ही भाषण में कहे थे कि हम बनारस को क्योटो सिटी बनाएंगे लेकिन क्या इस जाम को देखते हुए शहर बनारस कभी क्योटो सिटी बन पाएगा या टोटो सिटी ही रह पाएगा,