आओ दिल में उतर जाओ
………………………….. …
ग़ज़ल
बस कभी ही कभी इधर आओ
इतना ज़्यादा न तुम नज़र आओ
ठीक से तुम नज़र नहीं आते
तुम ऊंचाई से अब उतर आओ
तुम हो आज़ाद चाहे जाओ जिधर
लेकिन इक बार भी इधर आओ
इससे महफ़ूज़ दर नहीं कोई
आओ दिल में मेरे उतर आओ
याद करती है बस तुम्हें ही”निशा”
देर से ही सही मगर आओ
डॉ नसीमा निशा
वाराणसी