Friday, August 29, 2025

ब्रह्म सागर ने मनाया अपना द्वितीय वार्षिकोत्सव ब्रह्म सागर संदेश स्मारिका का हुआ विमोचन

ब्रह्म सागर ने मनाया अपना द्वितीय वार्षिकोत्सव

ब्रह्म सागर संदेश स्मारिका का हुआ विमोचन

लखनऊ

रत्ना तिवारी

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी के प्रेरणा से भारत की सनातन संस्कृति ज्ञान और गौरवशाली मूल्यों की पुनः स्थापना ब्रह्म समाज का एकीकरण तथा इस शक्ति को महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य के साथ जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत विभूषित अमृतानंद देवतीर्थ, शारदा सर्वग्य पीठम श्रीनगर कश्मीर की प्रेरणा एवं अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ में आज ब्रह्म सागर ने अपने द्वितीय अधिवेशन का आयोजन किया।कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक ऋचाओं दीप प्रज्वलन और आदि शंकराचार्य जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।इस अवसर पर ब्रह्मसागर संदेश नमक स्मारिका का विमोचन तथा देश के विभिन्न अंचलों से पधारे ब्राह्मण संगठनों के प्रतिनिधि जनों को अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार डॉ दिनेश शर्मा जी ने ब्राह्मणों की एक जुटता की सराहना करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव वसुधैव कुटुंबकम की भावना का संवाहक रहा है।मुख्य वक्ता के रूप में ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता वेद विद्या मार्तंड डॉक्टर विद्यासागर उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्राह्मण समाज सनातन काल से ही गौरवशाली अतीत का साक्षी रहा है तथा समाज को एक दिशा देते आए हैं उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्म समाज की सहिष्णुता त्याग तपस्या वीरता और विविधता ने विश्व में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अब जरूरत है कि आने वाली पीढ़ी को जगा कर पुनः सनातन संस्कृति, गौरवशाली अतीत और स्वर्णिम भविष्य के संकल्प को आत्मसात कर भारत को पुनः विश्व गुरु और सोने की चिड़िया बनाने में योगदान दें। आज का यह मंथन इस ओर बढ़ने की सराहनीय पहल है। इसके अतिरिक्त इस ऐतिहासिक वार्षिक अधिवेशन में प्रख्यात विद्वान कौशिक चैतन्य जी के साथ देश के कोने-कोने से पधारे आध्यात्मिक धर्म गुरु, चिंतक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, वैदिक मर्मज्ञ, सनातनी इतिहासकार, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायाधीश, समाजसेवी सहित मनीषा जगत की महान विभूतियों ने ब्राह्मणों के कल्याण, खोई हुई विरासत को पुनः प्राप्त करने तथा ब्राह्मणों के एकीकरण की माहती आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। आध्यात्मिक जगत और मनीषा जगत के विद्वान संत महामंडलेश्वर श्री अभयानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की सनातन संस्कृति हमेशा से शिक्षा और ज्ञान का केंद्र रही है। ब्रह्मसागर के राष्ट्रीय अध्यक्ष आई ए एस कैप्टन एस के द्विवेदी ने देश के अनेक अंचलों से पधारे ब्राह्मणवंशियों से अपील की कि देश में ब्राह्मणों की स्थिति ठीक नहीं है, यदि हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी ।अधिवेशन के दोनों सत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। धन्यवाद ज्ञापन और श्रीमद्जगद्गुरु शंकराचार्य जी आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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