Friday, August 29, 2025

सोनभद्र से पश्चिम गुप्तकाशी परिक्षेत्र में शिवद्वार जिसे दक्षिणकाशी द्वितीयकाशी कहा जाता है

घोरावल
सोनभद्र से पश्चिम गुप्तकाशी परिक्षेत्र में शिवद्वार जिसे दक्षिणकाशी द्वितीयकाशी कहा जाता है पुराकाल से वहीं आज बुधवार को महायज्ञ सोन विन्ध्य गंगा सेवा संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के चौथे दिन वृंदावन से पधारी साक्षी किशोरी जी की कथा सती के पुनर्जन्म पार्वती स्वरूपा की कथा का प्रसंग बताया गया ।पार्वती के आग्रह पर देवाधिदेव महादेव द्वारा श्रीराम की कथा कही गई। “नारद शाप दीन्ह एक बारा” से श्रीराम के धरती और अवतरण करने की बात कही फिर नारद के समाधिस्थ होने पर इन्द्र की व्याकुलता और उनका तप भंग करने के लिए कामदेव का जाना व पुनः नारद के चरणों में कामदेव का नतमस्तक हो जाने के विशद आख्यान प्रस्तुत किये जिसमें नारद के अहंकार की अभिवृद्धि होने की दास्तान भी बताई। इसके बाद पार्वती के पुत्र कार्तिकेय द्वारा तारकासुर बध और याज्ञवल्क्य की तपस्या और भारद्वाज ऋषि आश्रम में वृहद कथा सुनाई। आयोजन के मुख्यअतिथि रहे गणेशदेव पाण्डे पूजा आरती के साथ।
आचार्य पण्डित प्रशांत त्रिपाठी, क्षमा द्विवेदी, अनुष्का पाठक, अन्य यज्ञाचार्य गण के साथ संगीत वादन गायन करने वाले वृन्दावन से आये राजेश शास्त्री,सुनील पाठक,आशीषपाण्डे,सर्वेशसिंह,धनंजय शाह के वादन की उत्ताल तरंगों से अभिगुंजित रह आद्योपांत तो भक्तिभाव से गुंजायमान रहा समूचा परिसर रमेश राम पाण्डे,विजयानन्द मिश्र, डॉ.परमेश्वर दयाल पुष्कर, मुन्नरयादव ,कमलाप्रसाद वैस, उदयनारायण सिंह, अजयगिरि, राघवेन्द्र सिंह के साथ सभागार में उपस्थित समष्टिहित समुदाय रहा ओतप्रोत कथा प्रवचन यज्ञादि आनंद से।

escort bayan sakarya escort bayan eskişehir