Friday, August 29, 2025

चौबेपुर मे विराजमान हैं लेटे हुए हनुमान जी बाबा अड़गड़नाथ के नाम से पूजते हैं भक्तगण

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*चिरईगांव/वाराणसी -*”अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषण:।कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:।।*

*सप्तैतान् संस्मरेनिन्त्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।”*

उपरोक्त श्लोक की प्रारंभ की दो पंक्तियों का अर्थ है कि अश्वत्थामा,राजा बलि,वेदव्यास,हनुमानजी,विभीषण,कृपाचार्य और परशुराम ये सात चिरंजीवी हैं।इसके साथ ही ऋषि मार्कण्डेय को भी अमर माना गया है।ऐसी मान्यता है कि ये सभी कलयुग के अंत तक पृथ्वी पर जीवित रहेंगे।

त्रेता युग में अंजनी एवं केसरी के पुत्र के रूप में हनुमान जी का जन्म हुआ था।जब हनुमानजी माता सीता की खोज में लंका गये और प्रभु श्रीराम का संदेश दिया तो माता सीता ने प्रसन्न होकर हनुमानजी को अजर-अमर होने का वरदान दिया था।ऐसा ही कुछ प्रमाण (कलयुग में विराजमान रहने का) मिलता है जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर चौबेपुर के समीप बहरामपुर गांव में जहां रेलवे लाइन के बगल में बाबा अड़गड़नाथ जी महाराज का मंदिर यहां पर हनुमान जी जमीन पर लेटे हुए हैं और उनके सिर की तरफ दीवाल में भी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है।जमीन में गड़े होने के कारण इन्हें भक्तगण बाबा अड़गड़नाथजी महाराज के नाम से पुकारते व पूजते हैं।आज भी अड़गड़नाथ हनुमान जी वाराणसी सहित पूर्वांचल के लोगों के आस्था का केंद्र हैं।

*अंग्रेजों के हुक्मरानों को दी थी चुनौती,बदलनी पड़ी थी रेलवे लाइन की दिशा-*

बाबा अड़गड़नाथ हनुमान जी के मुख्य पुजारी पलक यादव बताते हैं कि बाबा के चमत्कार के अनेकों उदाहरण हैं जिसमें प्रमुख रूप से एक उदाहरण ब्रिटिश काल है जब बाबा अड़गड़नाथ ने अग्रेंजों के हुक्मरानों को चुनौती दी थी।मंदिर के पास से गुजर रही रेल लाइन के निर्माण के समय दिनभर मजदूर मेहनत करके रेल की पटरियों को बिछाते थे और रात में बिछायी गयी पटरियों को उखाड़कर बाबा किनारे रख देते थे।यह क्रम महीनों तक चला लेकिन ब्रिटिश काल के समय हनुमान जी ने मंदिर परिसर से रेल लाइन को नहीं जाने दिया।ऐसी अनोखी घटना जब अंग्रेजों के हुक्मरानों को पता लगी तो वे भी मौके पर पहुंचे लेकिन मंदिर परिसर के समीप रेल की पटरी नहीं लगवा सके। अंततः रेल पटरी की दिशा बदलनी पड़ी।आज भी बाबा अड़गड़नाथ रेलवे लाइन से थोड़ी ही दूर पर विराजमान हैं।

*जमीन में गड़े होने के कारण कहलाये बाबा अड़गड़नाथ-*

क्षेत्र के श्रवण कुमार चौबे बताते हैं कि प्रयागराज में जमीन पर लेटे हुए हनुमान जी की भांति ही बाबा अड़गड़नाथ हनुमान जी बहरामपुर में जमीन पर लेटे हुए हैं।जमीन में गड़े होने के कारण ही अड़गड़नाथ हनुमान जी कहलाये।वहीं ढांका गांव के सत्यनारायण दुबे व भंदहाखुर्द गांव के जयनाथ दुबे बताते हैं ब्रिटिश काल में रेलवे मार्ग के निर्माण सहित कई अन्य कार्यों को कर दिया था गड़बड़ इस लिए कहलाए अड़गड़नाथ हनुमान जी।लोगों का कहना है कि आज भी रेल की पटरियों के किनारे जब बड़ी मशीनों जेसीबी आदि से कार्य होता है तो मंदिर परिसर के समीप बड़ी मशीनो का संचालन रूक जाता है और अंततः थक हार कर मजदूरों के माध्यम से दूर से लाकर मिट्टी ,गिट्टी व कंक्रीट आदि का कार्य करना पड़ता है।कारण जो भी हो लेकिन चौबेपुर (बहरामपुर) के लेटे हुए बाबा अड़गड़नाथ हनुमान जी का मंदिर आसपास के गांव के लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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