चिरईगांव/वाराणसी। अब किसानों को कीटनाशक दवाओं की बिक्री पर कैशमेमो या पक्की रसीद न देना कीटनाशक विक्रेताओं को भारी पड़ सकता है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी बृजेश कुमार विश्वकर्मा ने सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं नियमावली-1971 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि नियमों के तहत प्रत्येक विक्रेता को किसानों को कीटनाशक दवाओं की बिक्री के समय पक्की रसीद या कैशमेमो देना अनिवार्य है। इस रसीद में दवा का नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और विक्रय मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
इसके साथ ही सभी विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठान पर स्टॉक पंजिका, भंडार पंजिका और रेट बोर्ड जैसे अभिलेख अद्यतित रखने होंगे। दुकानों पर उपलब्ध कीटनाशक रसायनों की मात्रा और उनके दाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना भी आवश्यक है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में शिकायतें मिली हैं कि कई कीटनाशक विक्रेता किसानों को बिना रसीद के दवाएं बेच रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है। इस पर संज्ञान लेते हुए सोमवार को जिले के सभी विक्रेताओं को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे हर बिक्री पर अनिवार्य रूप से रसीद जारी करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि निरीक्षण के दौरान यदि कोई विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से अपील: अधिकारी ने किसानों से भी अपील की कि वे कीटनाशक खरीदते समय रसीद अवश्य लें और उसमें दर्ज विवरणों की जांच कर लें।