चिरईगांव (वाराणसी)।
रविवार की रात से सोमवार दोपहर तक चिरईगांव क्षेत्र के कई गांव बिजली संकट से जूझते रहे। लेढ़पुर, पूरनपट्टी (छाही) और जाल्हुपुर विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े दर्जनों गांवों में लगभग 13 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। पेयजल संकट ने हालात और खराब कर दिए। ग्रामीणों में विद्युत विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया।
महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
गर्मी और उमस से परेशान ग्रामीणों ने बताया कि बिना बिजली के स्थिति बेहद दयनीय हो गई। पानी की मोटरें नहीं चल सकीं, जिससे न तो पीने के लिए पानी मिला और न ही अन्य जरूरी कार्य हो सके। महिलाओं और बच्चों की स्थिति बेहद खराब रही।
अवर अभियंता का नहीं उठा फोन
बिजली गुल होने पर उपभोक्ताओं ने कई बार संबंधित अवर अभियंता को फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। रामचन्दीपुर, गोबरहां, मोकलपुर जैसे गांवों में हालात और खराब रहे, जहां बिजली की बार-बार आवाजाही से लोगों को राहत नहीं मिल सकी।
अधिशाषी अभियंता ने दी तकनीकी वजह
इस संबंध में अधिशाषी अभियंता शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि रविवार की रात छाही उपकेंद्र के पास हाईटेंशन तार पर पेड़ की डाल गिरने से तार टूट गया था, जिसे ठीक करने में समय लग गया। वहीं, लेढ़पुर के 132 केवी उपकेंद्र से लगातार ट्रिपिंग की शिकायतें आईं। उन्होंने माना कि तकनीकी दिक्कतों के चलते आपूर्ति बहाल होने में विलंब हुआ।
ग्रामीणों की मांग – जवाबदेही तय हो
बराई निवासी विजय कुमार, बीकापुर के सहदेव तिवारी, नेवादा के देवेंद्र सिंह, मोकलपुर के शत्रुघ्न सिंह.अशोक तिवारी, रामचन्दीपुर के बद्रीनारायण आदि ने कहा कि बिना पूर्व सूचना इतनी लंबी कटौती और अधिकारियों की उदासीनता अस्वीकार्य है। उन्होंने विभाग से मांग की कि जवाबदेही तय की जाए और ऐसे हालात की पुनरावृत्ति न हो।






