ऐतिहासिक स्पेस मिशन पर शुभांशु शुक्ला, आसमान को चीरता रॉकेट अंतरिक्ष स्टेशन की तरफ रवाना
भारत के अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया है. वो 25 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सिओम-4 मिशन पर रवाना हुए. शुभांशु के साथ पोलैंड-हंगरी समेत तीन अन्य देशों एस्ट्रोनॉट भी हैं. तीन अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा के बाद शुभांशु पहले भारतीय होंगे जो अंतरिक्ष यात्रा करेंगे. उनका ये मिशन 14 दिन का होगा. उन्हें अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना होते ही संदेश भी भेजा.
भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को 12.01 बजे स्पेस मिशन पर रवाना होते ही इतिहास रच दिया. शुभांशु ने नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सिओम-4 मिशन के जरिये अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी. शुभांशु चार सदस्यीय दल का हिस्सा हैं, जो फॉल्कन-9 रॉकेट के जरिये ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में बैठकर ISS के लिए रवाना हुए हैं. इससे पहले एक्सिओम-4 मिशन कई बार टाला जा चुका था. भारत के अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा इससे पहले 3 अप्रैल 1984 को स्पेस मिशन पर सोवियत संघ की मदद से गए थे. लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन पद पर हैं. 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद उन्हें स्पेस मिशन के लिए चुना गया था.
शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा गगनयान ह्युमन स्पेसफ्लाइट मिशन के लिए महत्वपूर्ण
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा को विशेषज्ञों ने बुधवार को भारत के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन ‘गगनयान’ के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया. 41 वर्ष बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा है. भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के 1984 में अंतरिक्ष में जाने के बाद शुभांशु शुक्ला दूसरे भारतीय होंगे. शुक्ला की उड़ान फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से सुबह 2:31 बजे ईडीटी (भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे) पर फाल्कन 9 रॉकेट पर एक नए स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में लॉन्च हुई.
इस शुभ मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक स्पेस सफर बताते हुए दी शुभकामनाऐ
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ,
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल,
आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ,
कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ,
प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रक्षेपण के तुरंत बाद शुक्ला को बधाई दी
चन्दौली से ~ तारकेश्वर पाण्डेय की एक रिपोर्ट