मोकलपुर विद्यालय में बच्चों से झाड़ू-कचरा उठवाने का मामला, अभिभावकों में आक्रोश
वाराणसी/चिरईगांव। शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले विद्यालय में जब मासूम हाथों में किताब और कॉपी की जगह झाड़ू और कचरा उठाने की टोकरी दिखे, तो यह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल दहला देता है। ऐसा ही नजारा मोकलपुर कंपोजिट विद्यालय में देखने को मिला, जहां हेडमास्टर लाल बहादुर ने बच्चों से सफाई करवाई।
विद्यालय परिसर में बच्चों को झाड़ू लगाते और कचरा उठाते देख ग्रामीण व अभिभावक हैरान रह गए। पूछताछ में पंचायत सहायक ने बताया कि सफाईकर्मी अब तक विद्यालय में नहीं आए हैं। उनका कोई निश्चित समय नहीं है और वे मनमाने वक्त पर आते हैं।
अधिकारियों से सवाल करने पर यह सफाई दी गई कि आज रोस्टर डे है और सफाईकर्मी रामचन्दीपुर में ड्यूटी पर हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इसकी भरपाई बच्चे क्यों करें? क्या उनकी पढ़ाई से बढ़कर विद्यालय की सफाई व्यवस्था है?
अभिभावकों का दर्द
गांव के निवासी रामनाथ ने कहा, “हम अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि झाड़ू और कचरा उठाने के लिए। यह बच्चों के साथ अन्याय है।”
वहीं अभिभावक विमला देवी ने गुस्से में कहा, “अगर सफाईकर्मी समय पर नहीं आते तो जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है, मासूम बच्चों से जबरन सफाई कराना शर्मनाक है।”
ग्रामीण शंभूनाथ का कहना है, “सरकार शिक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन हकीकत में बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।”
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिस स्थान पर बच्चों के सपने गढ़े जाने चाहिए, वहां उनसे झाड़ू और कचरा उठवाना कहां तक उचित है।