नन्द बाबा दर्शनिया ने दिये ये संदेश जाने क्या है इस नवरात्री

हाथी पर सवार मां दुर्गा : खुशहाली का संदेश
शारदीय नवरात्र इस बार 22 सितंबर से आरंभ होकर 1 अक्टूबर तक मनाए जाएंगे। चतुर्थी तिथि की वृद्धि के कारण यह नवरात्र नौ नहीं, बल्कि दस दिनों के होंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार माँ दुर्गा का आगमन हर वर्ष अलग-अलग सवारी पर होता है, जो सप्ताह के दिन से निर्धारित होता है। इस बार सोमवार से नवरात्र की शुरुआत हो रही है, इसलिए माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं।
हिंदू मान्यताओं में हाथी को शक्ति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। नन्द बाबा दर्शनिया ने बोला शास्त्रों के अनुसार जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो इसका अर्थ होता है कि समाज में सुख-शांति, धन-धान्य और खुशहाली का आगमन होगा। यह संकेत व्यापार, कृषि और श्रमजीवी वर्ग के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। आस्था है कि ऐसा वर्ष सामाजिक संतुलन और आर्थिक उन्नति लेकर आता है।
आज जब समाज आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और तनावपूर्ण परिस्थितियों से जूझ रहा है, तब माँ दुर्गा की यह सवारी हमें एक गहरा संदेश देती है। हाथी स्थिरता और धैर्य का प्रतीक है। इसका तात्पर्य है कि समाज में संतुलन और संयम से आगे बढ़ने पर ही स्थायी समृद्धि संभव है। केवल धन की वृद्धि ही वास्तविक विकास नहीं है, बल्कि सामाजिक सौहार्द, समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
नवरात्र का आरंभ घटस्थापना से होता है, जो साधना और संयम का प्रतीक है। जैसे सही विधि से की गई घटस्थापना पूरे नौ या दस दिनों की पूजा को सफल बनाती है, वैसे ही यदि समाज सही दिशा और निष्ठा से प्रयास करे तो सामूहिक भविष्य उज्ज्वल और फलदायी हो सकता है।
अतः इस बार का नवरात्र हमें केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। माँ दुर्गा का हाथी पर आगमन इस बात का संकेत है कि हमें स्थिरता और संतुलन के साथ आगे बढ़ना है, ताकि खुशहाली केवल कुछ लोगों तक न सिमटे, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। यही सच्चे अर्थों में नवरात्र की साधना और विजयदशमी का संदेश है।
चंदौली से ~ अभिषेक उपाध्याय की एक रिपोर्ट