Thursday, February 26, 2026

बुद्धि, धैर्य, और समृद्धि के साथ हाथी पर सवार होकर देगी दर्शन


चन्दौली सनातन रक्षा धर्म के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष व राष्ट्र श्रीजन के राष्टिय उपाध्यक्ष बृक्ष बंधु डां परशुराम सिंह ने
शारदीय नौ रात्रि के विषय मे बताया कि यह वर्ष
नवरात्र मानव और प्रकृति के मध्य मानव के गहरे, आंतरिक और चक्रीय संबंध को जोडकर आया हैं, जहाँ व्यक्ति प्रकृति के तीन गुणों – सतोगुण, रजोगुण, और तमोगुण – को संतुलित कर अपने आंतरिक ‘परा-प्रकृति’ के साथ जुड़ता है, जिसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही महत्व है। यह आत्म-शुद्धि, मानसिक व शारीरिक कायाकल्प और प्रकृति के संसाधनों के उचित उपयोग का समय है, जिससे जीवन के उद्देश्यों को निखारने में मदद मिलती है।
प्रकृति से संबंध
प्रकृति के गुणों से जुड़ाव: नवरात्रि नौ दिनों की साधना है जो प्रकृति के तीन गुणों (सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण) के संतुलन पर केंद्रित है। इन नौ दिनों में, पहले तीन दिन तमोगुण, अगले तीन दिन रजोगुण, और अंतिम तीन दिन सतोगुण की आराधना की जाती है।
प्रकृति का नवीनीकरण: यह समय प्रकृति में एक कायाकल्प की प्रक्रिया से जुड़ा है, जहाँ पुरानी चीजों को त्याग कर नया जीवन आता है। यह प्रकृति के चक्रीय स्वभाव का प्रतीक है।
प्रकृति के साथ सामंजस्य: नवरात्र के दौरान उपवास, ध्यान और मौन का अभ्यास करके व्यक्ति अपने अंत:करण को शुद्ध करता है, जिससे प्रकृति और वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित होता है।
पर्यावरण का सम्मान: यह पर्व पर्यावरण के प्रति भी जागरूकता लाता है। प्रकृति के संसाधनों का दुरुपयोग रोकने और प्रदूषण कम करने का संदेश दिया जाता है, क्योंकि प्रकृति का उचित उपयोग मानव कल्याण के लिए आवश्यक है।
मानव से संबंध
आत्म-चिंतन और शुद्धि: नवरात्रि आत्म-चिंतन, आत्म-संप्रेषण और स्रोत पर लौटने का समय है। उपवास और साधना द्वारा शरीर, मन और बुद्धि की शुद्धि होती है, जिससे थकान दूर होती है और ऊर्जा का संचार होता है।

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